छठ महापर्व का शुभारंभ और मुख्य तिथियां
छठ पूजा का महापर्व नहाय-खाय से शुरू होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। यह त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। इस दौरान व्रती महिलाएं सूर्य की पूजा और व्रत रखती हैं, जो लगभग 36 घंटे तक चलता है।
खरना पूजा का विशेष समय और शुभ मुहूर्त
खरना पूजा 26 अक्टूबर 2025 को आयोजित की जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:29 बजे और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा। व्रती महिलाएं सूर्यास्त के बाद यानी शाम 5:41 बजे के बाद ही खरना का पूजन और प्रसाद अर्पित कर सकती हैं। इस समय पूजा करने से सूर्य देव और छठी मैया की कृपा प्राप्त होती है।
खरना का प्रसाद और विधि
खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़, चावल और दूध से बनी खीर शामिल होती है। इसके साथ गेहूं के आटे की रोटी या पूरी भी बनाई जाती है। इस प्रसाद को पहले सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है, फिर व्रती स्वयं इसे ग्रहण करती हैं। खीर और रोटी खाने के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।
खरना पूजा की विधि और परंपराएं
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूरे दिन पानी पीए बिना व्रत रखें। पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें। सूर्यास्त के बाद फिर से स्नान कर नए वस्त्र धारण करें। मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से खीर बनाएं और इसे सूर्य देव तथा छठी मैया को भोग लगाएं। पूजा के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करती हैं और 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।
खरना से जुड़ी परंपराएं और महत्व
‘खरना’ का अर्थ है शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक। इस दिन मिट्टी के नए चूल्हे और आम की लकड़ी से प्रसाद बनाना परंपरा का हिस्सा है। खरना की पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुद्धता लाती है, साथ ही सूर्यदेव और छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है, जो श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।











