छठ पूजा 2025 का शुभारंभ और महत्व
छठ पूजा का पवित्र त्योहार वर्ष 2025 में शनिवार से शुरू हो रहा है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से छठी मईया और सूर्य भगवान (Suryadev) को समर्पित है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इस दौरान सूर्य भगवान की पूजा और उनके गीतों का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
छठी मईया के गीत और परंपराएँ
छठी मईया के गीतों में से एक प्रसिद्ध गीत है, जिसमें केलवा के पत्ते पर उगने वाले सूर्य मल का जिक्र होता है। इस गीत में श्रद्धालु सूर्य भगवान से अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने की प्रार्थना करते हैं। गीत के बोल इस प्रकार हैं: “केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल, झांके ऊंके…”। इन गीतों का गायन व्रत के दौरान श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
व्रत की विशेषताएँ और परंपराएँ
छठ व्रत में पंडित या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह मन के भाव और श्रद्धा से किया जाता है। व्रतियों का मुख्य उद्देश्य सूर्य भगवान की पूजा करना और उनके प्रकाश से जीवन में सुख-समृद्धि लाना है। व्रत के दौरान श्रद्धालु सूरज उगने और डूबने के समय विशेष पूजा करते हैं, जिसमें सूर्य भगवान को अर्घ्य देना और गीत गाना शामिल है।
छठ पूजा के गीत और श्रद्धा का महत्त्व
छठ पूजा के गीतों में श्रद्धालु अपने परिवार और अपने बेटों के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। जैसे कि नारियल, अमरुद और पवन स्वामी जैसे देवताओं का उल्लेख इन गीतों में होता है। इन गीतों का गायन व्रत के दौरान श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो व्रतियों के मन को श्रद्धा से भर देता है।
आधुनिक संदर्भ और परंपरा का निर्वहन
आज भी छठ पूजा की परंपराएँ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जाती हैं। यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी माध्यम है। इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु सूर्य भगवान की पूजा कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।









