पर्व के दौरान मृत्यु होने पर क्या करें?
प्रेमानंद जी महाराज से पूछा गया कि यदि किसी त्योहार के मौके पर घर में किसी सदस्य का निधन हो जाए, तो ऐसी स्थिति में क्या कदम उठाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब परिवार में त्योहार के समय किसी की मृत्यु हो जाती है, तो स्वाभाविक रूप से घर में शोक का माहौल बन जाता है। ऐसे समय में त्योहार का उल्लास नहीं मनाया जाता। हालांकि, उस दिन शांतिपूर्वक प्रभु का नाम जपना, कथा सुनना और कीर्तन करना उचित माना जाता है।
क्या उस पर्व को जीवनभर नहीं मनाना चाहिए?
एक अन्य सवाल में पूछा गया कि क्या सही है कि जब घर में किसी सदस्य का निधन हो जाता है, तो उस त्योहार को फिर कभी नहीं मनाया जाता। यह परंपरा तब तक जारी रहती है जब तक घर में किसी का जन्म न हो। प्रेमानंद जी महाराज ने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह समाज द्वारा बनाए गए नियम हैं, जिनका शास्त्रों या धर्म से कोई संबंध नहीं है। हर दिन हजारों लोगों का निधन होता है, इसलिए इन बातों को मानना संभव नहीं है कि त्योहार कभी नहीं मनाए जाएंगे।
शास्त्रों में मृत्यु के बाद त्योहारों का क्या निर्देश है?
प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट किया कि शास्त्रों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि मृत्यु के बाद त्योहारों को स्थगित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब किसी की मृत्यु होती है, तो उस दिन शोक मनाना चाहिए और शास्त्रों में बताए गए 11 दिनों के शोककाल का पालन करना चाहिए। इसके बाद सामान्य दिनों की तरह ही सभी त्योहार फिर से मनाए जा सकते हैं। मृत्यु के कारण किसी भी त्योहार या पर्व पर रोक लगाने का कोई नियम नहीं है।











