राजस्थान के हाईवे पर बढ़ते सड़क हादसों का संकट
राजस्थान के राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर दुर्घटनाओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे आम जनता का जीवन खतरे में पड़ गया है। पिछले कुछ महीनों में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं, और आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। नवंबर के पहले चार दिनों में ही प्रदेशभर में 64 मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि अक्टूबर महीने में कुल 771 लोगों ने अपनी जान गंवाई। वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक, सड़क हादसों में कुल 9711 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जो सरकार की ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के प्रति गंभीर सवाल खड़े करता है।
भयावह सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं और उनके कारण
जयपुर में हाल ही में हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। यहां एक बेकाबू डंपर ने 40 से अधिक वाहनों को टक्कर मारी, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले जोधपुर जिले के फलोदी में श्रद्धालुओं का टेंपो ट्रैवलर भारतमाला एक्सप्रेस-वे पर खड़े ट्रक से टकरा गया, जिसमें 15 यात्रियों की जान चली गई। इन घटनाओं में नशे की हालत में ड्राइवर का वाहन चलाना, लापरवाही और खराब सड़कें मुख्य कारण माने जा रहे हैं। राजस्थान में सड़क हादसों का मुख्य कारण खराब सड़कें और ड्राइविंग में लापरवाही है, जिनके कारण साल 2025 में अब तक 1445 दुर्घटनाएं हुई हैं।
सड़क सुरक्षा में खामियों और सरकार की भूमिका
राज्य में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, और यह आंकड़ा चिंता का विषय बन चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवंबर तक हर महीने हजारों लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। सबसे अधिक हादसे पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) की सड़कों पर होते हैं, जिनकी संख्या 429 है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी हादसों की संख्या कम नहीं है। देश में राजस्थान का स्थान सड़क दुर्घटनाओं के मामले में छठे और मौतों के मामले में सातवें नंबर पर है। सरकार का दावा है कि सड़क सुरक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लापरवाही और नशे की हालत में ड्राइविंग जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। सरकार ने जागरूकता अभियान चलाने और सड़क सुधार कार्यों को तेज करने का आश्वासन दिया है।











