दस राज्यों में फैले निवेश घोटाले का खुलासा
एक प्रमुख निवेश कंपनी पर आरोप है कि उसने भारत के दस राज्यों में लगभग तीन लाख निवेशकों से मिलकर करीब एक हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इस कंपनी ने 11 से 18 प्रतिशत मासिक रिटर्न का लालच देकर लोगों से पैसा जमा किया, लेकिन जांच में पता चला कि यह एक बड़ा फर्जीवाड़ा था। हवाला नेटवर्क और फर्जी खातों के माध्यम से फंड ट्रांसफर कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया था।
शिकायत और कंपनी का धोखा
मामला तब उजागर हुआ जब बिजय कुमार पाणिग्रही नामक एक निवेशक ने शिकायत दर्ज कराई कि उसने अपनी रिटायरमेंट बचत लगभग 92.6 लाख रुपये इस कंपनी में निवेश की थी। शुरुआत में कंपनी ने कुछ ब्याज भी दिया, लेकिन जल्द ही उसने अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए और उसकी वेबसाइट तथा ग्राहक सेवा को ब्लॉक कर दिया। निवेशक लगातार आश्वासन प्राप्त करता रहा, लेकिन उसके पैसे वापस नहीं मिले।
धोखाधड़ी का तरीका और जांच
प्रारंभिक जांच में पता चला कि कंपनी ने कटक और भुवनेश्वर में बड़े-बड़े प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे निवेशकों का विश्वास जीता गया। बाद में कंपनी ने अचानक अपना अस्तित्व ही समाप्त कर दिया और निवेशकों के पैसे हड़प लिए। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के संचालक ने फर्जी खातों और हवाला नेटवर्क का सहारा लेकर रकम इधर-उधर की और बार-बार बैंक खातों को बदलता रहा, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा सके।
विस्तृत फर्जीवाड़ा और आगे की कार्रवाई
यह घोटाला ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे दस राज्यों में फैल चुका है। ईओडब्ल्यू (EOW) इस फंड ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे इस बड़े धोखाधड़ी के जाल का पर्दाफाश हो सके।











