सतारा में महिला डॉक्टर की आत्महत्या और आरोपों का मामला
सतारा जिले में एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। उसने हथेली पर सुसाइड नोट लिखकर पुलिस अधिकारी पर बलात्कार का आरोप लगाया और साथ ही एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप भी लगाया। इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग
पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि यदि महिला की शिकायतों को उसके “सरनेम” या बीड से होने के कारण नजरअंदाज किया गया, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी से कराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए। मुंडे ने यह भी संकेत दिया कि वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस संबंध में पत्र लिखेंगे।
वहीं, अंबादास दानवे ने कहा कि मराठवाड़ा की इस बेटी की आत्महत्या यह दर्शाती है कि जिन अधिकारियों पर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही उसके लिए खतरा बन गए। उन्होंने मांग की है कि सतारा जिले के बाहर के अधिकारियों की एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए, जो इस मामले की निष्पक्ष जांच करे।
मंत्री शंभूराज देसाई का कड़ा रुख
राज्य के मंत्री शंभूराज देसाई ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फलटण की घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत जिला पुलिस प्रमुख को निर्देश दिए हैं। इस केस की जांच के लिए एक महिला पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मृतका के परिजन किसी और पर शक करते हैं, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। साथ ही, फरार आरोपियों की तलाश के लिए चार विशेष पुलिस टीमें रवाना कर दी गई हैं। सतारा पुलिस इस जाँच में पूरी ताकत लगा रही है ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
पुलिस और परिजनों के बीच तनावपूर्ण स्थिति
महिला डॉक्टर के परिजनों का आरोप है कि उन्हें पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल टेस्ट बदलने के लिए कहा गया ताकि रिपोर्ट पुलिस की सुविधा के अनुसार तैयार की जा सके।
एक सामाजिक कार्यकर्ता नितिन अंधाले ने उस महिला डॉक्टर का बयान साझा किया है, जिसमें उसने बताया कि एक सांसद ने फोन पर आरोप लगाया कि उसने एक आरोपी को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया, क्योंकि वह बीड से है।
डॉक्टर ने यह भी कहा कि पुलिस ने जानबूझकर किसी और डॉक्टर से जांच कराने से इनकार किया। उसने एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक महिला को ब्लड प्रेशर से सिर दर्द था, लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती उसे फिटनेस सर्टिफिकेट दिलाया और बिना इलाज कराए ही ले गई।
उसने यह भी बताया कि सब-इंस्पेक्टर गोपाल बडाने ने अस्पताल में धमकी दी थी। महिला डॉक्टर ने इस पूरे मामले की शिकायत जून 2025 में डिप्टी एसपी से की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।











