भारत में खतरनाक ओरल लिक्विड दवाओं का मामला सामने आया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में निर्मित तीन विशेष ओरल लिक्विड दवाओं के संदर्भ में गंभीर चेतावनी जारी की है। इन दवाओं को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है और इनमें जानलेवा रसायन डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol – DEG) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस रसायन का सेवन करने से भारत में बच्चों की मौत के कई मामले प्रकाश में आए हैं। WHO ने यह अलर्ट 8 अक्टूबर 2025 को भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जारी किया है।
मामले की जांच और दवाओं का प्रतिबंध
सीडीएससीओ ने 30 सितंबर को WHO की रिपोर्ट के बाद तुरंत ही इन दूषित दवाओं के उत्पादन पर रोक लगाई और उनके बाजार में वितरण को बंद कर दिया। इन दवाओं का उपयोग सामान्य सर्दी, फ्लू या खांसी के लक्षणों से राहत पाने के लिए किया जाता है। प्रभावित सिरप और उनके निर्माता कंपनियों की पहचान भी कर ली गई है, जिनमें शामिल हैं: COLDRIF (Sresan Pharmaceutical), Respifresh TR (Rednex Pharmaceuticals), ReLife (Shape Pharma)। साथ ही, इन दवाओं का उत्पादन भारत में तुरंत बंद कर दिया गया है और रिकॉल प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आगे की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय निगरानी
सीडीएससीओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत से इन दूषित दवाओं का कोई भी निर्यात नहीं किया गया है और वर्तमान में कोई अवैध निर्यात का सबूत नहीं मिला है। सभी संबंधित राज्य प्राधिकरणों को इन निर्माण स्थलों पर उत्पादन रोकने और उत्पादों को निलंबित करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, बाजार से इन दवाओं को वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। WHO ने भारत सहित सभी राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (NRAs) को सतर्क रहने और अनियमित आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निगरानी रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से दिसंबर 2024 से इन निर्मित दवाओं के जोखिमों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने का निर्देश भी दिया गया है। WHO भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रहा है और संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों को कम करने के लिए कदम उठा रहा है।











