उज्जैन में युवती पर अंधविश्वास का कहर
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक युवती के साथ अंधविश्वास के नाम पर हुई क्रूरता का मामला सामने आया है। यहां एक युवती को उसकी जली हुई हथेलियों और जले हुए सिर के घाव दिखाकर उसकी शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। इन घावों के अलावा, ऐसी कई चोटें हैं जो बाहर से दिखाई नहीं देतीं, लेकिन वे युवती के शरीर और मन पर गहरे जख्म की तरह हैं। इन घावों का कारण भूत-प्रेत भगाने के नाम पर किया गया क्रूरता है।
भयावह यातनाएं और अंधविश्वास का प्रभाव
उर्मिला नामक युवती का आरोप है कि उसके शरीर पर भूत-प्रेत का साया होने का आरोप लगाकर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उसे न सिर्फ मारपीट का शिकार बनाया गया, बल्कि जलती हुई रूई की बातियों को उसके हाथों में रखकर और गर्म सिक्के से उसके सिर पर दाग लगाकर उसकी यातनाएं बढ़ाई गईं। घटना नवरात्रि के दौरान हुई, जब युवती को उसके पिता खाचरौद के गांव में सुगा बाई नामक महिला के हवाले कर गए थे। सुगा बाई को मान्यता है कि वे माता का ईष्ट हैं और इसी विश्वास के आधार पर भूत-प्रेत भगाने का काम करती हैं।
पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, आरोपी हिरासत में
घटना के दस दिन बाद युवती ने उज्जैन महिला थाने पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए खाचरौद पुलिस की मदद से तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है और बाकी की तलाश जारी है। युवती का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि अंधविश्वास के नाम पर हो रही इन क्रूरताओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अंधविश्वास और आधुनिकता के बीच संघर्ष
यह मामला दर्शाता है कि भले ही हम 21वीं सदी में पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी भी कुछ लोग अंधविश्वास के जंजाल में फंसे हुए हैं। भूत-प्रेत और ऊपरी हवा को सच मानकर वे अपने ही परिवार और समाज के लोगों के जीवन को खतरे में डाल देते हैं। ऐसे लोग ढोंग और अंधविश्वास का सहारा लेकर दूसरों को यातनाएं देते हैं और पैसे कमाने का धंधा करते हैं। यह घटना एक बार फिर हमें चेतावनी देती है कि समाज में जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से इन कुरीतियों को खत्म करना जरूरी है।











