उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का विवाद और आस्था का प्रतीक
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान खड़ी हनुमान प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा को हटाने की कोशिशों से जुड़ी कई वीडियो और दावे वायरल होने लगे, जिससे यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। कुछ लोगों ने इसे आस्था का सवाल बताया, तो वहीं अन्य ने प्रतिमा के न हटने को चमत्कार से जोड़ दिया। इन दावों की सच्चाई और प्रशासन का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है।
प्रतिमा के पास उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और देशभर से पहुंचने वाले भक्त
जब मैं शुक्रवार को छत्री चौक के पास स्थित हनुमान मंदिर पहुंचा, तो वहां का नजारा पूरी तरह से अलग था। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगी थीं, जिनमें केवल उज्जैन के ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, दिल्ली, उड़ीसा और बिहार से आए श्रद्धालु भी शामिल थे। यह दर्शाता है कि खड़े हनुमान की प्रतिमा के प्रति देशभर में आस्था और जिज्ञासा कितनी गहरी है।
आस्था और सोशल मीडिया की भूमिका में जिज्ञासा का विस्तार
मंदिर के बाहर खड़ी इस प्रतिमा का महत्व लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए खास रहा है। लेकिन इन दिनों बाहर की भीड़ में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। इनमें से कई लोग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और रील्स देखकर यहां पहुंचे हैं। दिल्ली की युवतियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान की चर्चा ने उनकी जिज्ञासा को बढ़ाया, जिसके बाद उन्होंने सीधे मंदिर पहुंचने का फैसला किया।
महाराष्ट्र से आए परिवार ने बताया कि होटल के रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें इस प्रतिमा के बारे में जानकारी दी और बताया कि इसे हटाने की कोशिशें हुईं, लेकिन प्रतिमा नहीं हटी। इसी जिज्ञासा ने उन्हें मंदिर तक खींच लिया। वहीं, दिल्ली के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने बताया कि इंटरनेट पर खोजबीन के दौरान उन्हें हर जगह खड़े हनुमान का जिक्र मिला, जिसने उनकी यात्रा को प्रेरित किया। उड़ीसा और बिहार से आए श्रद्धालु भी इस प्रतिमा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष और विवाद की वर्तमान स्थिति
सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं, जिनमें यह कहा जा रहा है कि प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने की चार बार कोशिश की, लेकिन हर बार असफल रहा। कुछ वीडियो में AI की मदद से बनाए गए ऐसे दृश्य भी दिखाए गए हैं, जिनमें क्रेन टूटती हुई नजर आती है। इन दावों ने लोगों में जिज्ञासा और उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।
लेकिन जब हमने उज्जैन के SDM (Sub-Divisional Magistrate) से बात की, तो उन्होंने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया। उनका कहना है कि प्रशासन ने न तो मशीनों का प्रयोग कर और न ही मैनुअली प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंदिर के पुजारी की सलाह पर विशेषज्ञों की एक टीम को प्रतिमा का वैज्ञानिक परीक्षण करने के लिए कहा गया है, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। आगे का फैसला इन रिपोर्टों के आधार पर ही लिया जाएगा।
प्रशासन का यह भी कहना है कि इस प्रक्रिया में स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। हालांकि, जमीन पर तस्वीरें और स्थानीय समर्थन इस विवाद की जड़ को दिखाते हैं। मंदिर के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगाया गया है, जिसमें लोगों से हस्ताक्षर कर समर्थन जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया की भूमिका और आस्था का मेल उज्जैन की पहचान बन चुका है। खड़े हनुमान की यह प्रतिमा अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आस्था और जिज्ञासा का प्रतीक बन चुकी है।










