मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में कीर्तिमान स्थापित किया
मध्य प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों ने शीर्ष स्थान प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। इन शहरों ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में अपनी जगह बनाकर देशभर में अपनी पहचान बनाई है।
स्वच्छ वायु पुरस्कार से सम्मानित शहरों का प्रदर्शन
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित समारोह में इन शहरों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने इन शहरों के प्रतिनिधियों को पुरस्कार प्रदान किए।
इंदौर ने द्वितीय स्थान, जबलपुर ने तृतीय स्थान और भोपाल ने चौथा स्थान प्राप्त किया। इन शहरों ने प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सफाई, हरित क्षेत्र विस्तार और नागरिक भागीदारी जैसे प्रयासों के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है।
शहरों की सफलता की मुख्य वजहें और अन्य शहरों का प्रदर्शन
इंदौर ने मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, धूल नियंत्रण और हरित क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ नागरिक सहभागिता के माध्यम से यह स्थान हासिल किया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला ने इस सम्मान को प्राप्त किया।
जबलपुर ने प्रदूषण नियंत्रण और सुनियोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यों के कारण तीसरा स्थान प्राप्त किया। महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ और निगम आयुक्त राम प्रसाद अहिरवार की टीम ने इस उपलब्धि का सम्मान प्राप्त किया।
भोपाल ने चौथा स्थान हासिल किया, जबकि ग्वालियर इस श्रेणी में 39वें स्थान पर रहा। भोपाल के वार्ड क्रमांक-60 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान मिला, जहां सघन पौधारोपण और नागरिक जागरूकता के प्रयासों को सराहा गया।
इसके अलावा, प्रदेश के अन्य शहरों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। उज्जैन ने 16वां और सागर ने 21वां स्थान प्राप्त किया, जबकि देवास ने 7वां स्थान हासिल किया। इस सर्वेक्षण में कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के शहरों ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।









