रायसेन में किन्नर समाज का पारंपरिक कजलियां पर्व धूमधाम से मनाया गया
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में किन्नर समुदाय ने अपनी प्रसिद्ध कजलियां चल पर्व को बड़े ही उल्लास और परंपरागत तरीके से मनाया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों की खुशहाली, शांति और अच्छी वर्षा के लिए प्रार्थना करना था। ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों की धुन पर निकले इस जुलूस में कई शहरों से आए किन्नर समाज के सदस्य शामिल हुए। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूजा-अर्चना और आरती के बाद, कजलियों का विसर्जन मिश्र तालाब में किया गया, जो इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा।
200 साल पुरानी परंपरा के अनुसार कजलियां पर्व का आयोजन
रायसेन में किन्नर समुदाय द्वारा कजलियां निकालने की परंपरा लगभग दो सौ वर्षों से चली आ रही है। इस दौरान, सावन के पूरे महीने वे लोगों की खुशहाली, अमन-चैन और अच्छी वर्षा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस पर्व के दौरान नाच-गाकर और गीत गाकर सभी के लिए शुभकामनाएं दी जाती हैं। करीना किन्नर ने बताया कि यह परंपरा उनके समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है, और वे हर साल इस आयोजन के माध्यम से समाज में सद्भाव और एकता का संदेश फैलाते हैं। इस दिन किन्नर समाज का उत्साह चरम पर होता है, और वे अपने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर जुलूस में भाग लेते हैं।
सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक
रायसेन में इस धार्मिक जुलूस का आयोजन सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक एकता का भी प्रतीक है। जुलूस के दौरान, किन्नर समाज के बुजुर्ग, युवा और अन्य शहरों से आए लोग मिलकर इस पर्व को मनाते हैं। जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरता है, जिसमें नृत्य, गीत और पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। इस दौरान, शहर के नागरिकों और व्यापारियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर इस परंपरागत आयोजन का स्वागत किया। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक मेलजोल और भाईचारे का भी संदेश देता है।










