कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण का सफल प्रयास
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दो दिवसीय दौरे का समापन सोमवार को हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति ने चीता संरक्षण परियोजना की प्रगति का निरीक्षण किया और सीधे चीता मित्रों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि भारत में चीता पुनर्स्थापन का यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण और सफल साबित हो रहा है।
चीता मित्रों ने राष्ट्रपति को दी जानकारी
राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान चीता मित्रों ने बताया कि कूनो पार्क की सीमा से लगे सभी गांवों में वे पूरी तत्परता से तैनात हैं। वे ग्रामीणों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं, जिसमें यह समझाया जा रहा है कि स्वाभाविक रूप से चीते इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते। यदि कभी कोई चीता आबादी वाले क्षेत्र या खेतों की ओर आ जाए, तो ग्रामीण घबराने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करते हैं। इस सामंजस्यपूर्ण तालमेल के कारण ही भारत की इस महत्वपूर्ण पुनर्बसाहट परियोजना सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रही है।
भारत में चीतों की पुनर्स्थापन योजना की प्रगति
भारत की मिट्टी पर जन्मे 32 चीतों का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि विदेशी चीतों को भारत का पर्यावरण पूरी तरह से अनुकूल हो चुका है। यह संख्या वर्तमान में देश में मौजूद कुल 52 चीतों में से है, जिनमें से 49 कूनो नेशनल पार्क में हैं और तीन को मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में स्थानांतरित किया गया है।
रविवार को राष्ट्रपति ने कूनो के हाईटेक ‘चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर’ का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने सैटेलाइट ट्रैकिंग और पल-पल की निगरानी की अत्याधुनिक व्यवस्था का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने जंगल में हर दो किलोमीटर पर बनाए गए ‘वॉटर पिट’ की व्यवस्था की भी प्रशंसा की, जिससे वन्यजीव पानी के लिए भटकने से बच सकें।
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे का समापन कूनो हेलीपैड पर हुआ, जहां से वे हेलीकॉप्टर के जरिए ग्वालियर के लिए रवाना हो गईं। इस दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल, मंत्री, सांसद और अन्य अधिकारियों ने उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया। ग्वालियर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने वायुसेना के विमान से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।










