दमोह हाई कोर्ट का बड़ा फैसला हिजाब विवाद में
दमोह (Damoh) के गंगा जमना स्कूल मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस फैसले में FIR को रद्द करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है, और हिजाब तथा धार्मिक दबाव से जुड़े आरोपों की विस्तृत सुनवाई का संकेत दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप शुरुआती तौर पर निराधार नहीं हैं, और इनकी जांच साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
स्कूल में हिजाब और धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद
मामले में आरोप था कि स्कूल में छात्राओं को हिजाब पहनना, नमाज पढ़ना और उर्दू भाषा सीखना अनिवार्य किया गया था। इसके साथ ही यह भी आरोप था कि हिंदू और जैन छात्राओं को तिलक लगाने और कलावा बांधने से रोका जाता था। इन आरोपों के तहत IPC की धारा 295-A, 120-B और 506 के साथ ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और मध्य प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के प्रावधान भी लगाए गए थे। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि FIR में यह आरोप था कि छात्रों को धमकी और दबाव के माध्यम से उनकी मर्जी के खिलाफ एक विशेष ड्रेस कोड और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई
मामले में पुलिस ने पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस विवाद की जांच जारी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रारंभिक रूप से निराधार नहीं माना जा सकता, और इनकी सच्चाई का पता केवल साक्ष्यों के आधार पर ही लगाया जाएगा। इस फैसले के साथ ही हिजाब विवाद में न्यायालय ने आगे की सुनवाई का संकेत दे दिया है, जो इस मुद्दे की जटिलता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।









