मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव
मध्य प्रदेश सरकार आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। सरकार इसे सामाजिक समानता के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा बताया है।
बजट और विधायी कार्यों की संभावनाएं
इस सत्र में वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। साथ ही, कई महत्वपूर्ण विधेयकों और संशोधनों पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही स्पष्ट किया है कि राज्य में जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इस दिशा में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। सरकार का दावा है कि यह समिति विभिन्न जिलों का दौरा कर सभी धर्मों के लोगों से सुझाव प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘रिपोर्ट तैयार होने के बाद हम चाहते हैं कि मध्य प्रदेश में जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता लागू हो। जनता भी इसे लागू होते देखना चाहती है।’
सामाजिक संवाद और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार ने यूसीसी से संबंधित एक विशेष वेबसाइट भी शुरू की है, जहां आम नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने जनता से इस विषय पर अपनी राय साझा करने का आह्वान किया है। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम आदिवासी समुदाय की परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। पूर्व मंत्री और प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि सरकार समानता के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रही है।











