मध्य प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी कलह का खुलासा
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जो अब पार्टी के आंतरिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी सार्वजनिक हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक स्पष्ट देखी जा सकती है।
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अंदरूनी टकराव
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने स्थिति संभालने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, लेकिन यह बैठक विवाद को और बढ़ाने वाली साबित हुई। जब दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सामने नटराजन का फॉर्म भरवाने वाले जेपी धनोपिया को स्पष्टीकरण देने को कहा, तो प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने बीच में ही टोक दिया। इस घटना के दौरान हरीश चौधरी ने रूखे लहजे में कहा, “हम कर लेंगे,” जिस पर दिग्विजय सिंह असहज हो गए और हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी।
विवाद की गहराई और कोर्ट का फैसला
इसके बाद जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया और दिग्विजय सिंह से मीडिया में अपनी बात रखने का अनुरोध किया, तो उन्होंने तल्ख तेवर दिखाते हुए बोलने से इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में अभी भी ‘सिर फुटौव्वल’ का दौर जारी है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। हालांकि, कोर्ट ने नटराजन को चुनाव पूरी होने के बाद चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति दी है।
इस पूरे विवाद में वरिष्ठ वकीलों के बीच भी तीखी बहस हुई। अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत केवल उन मामलों में आपराधिक सजा का प्रावधान होता है, जिनमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा हो, जबकि नटराजन को तेलंगाना (Telangana) के एक मामले में केवल समन जारी हुआ था। दूसरी ओर, मुकुल रोहतगी और तुषार मेहता ने कहा कि चुनाव लड़ना एक वैधानिक अधिकार है, जिसे केवल कानून के तहत ही चुनौती दी जा सकती है।
कहां हुई गलती और क्यों छूटी सीट
यह विवाद मुख्य रूप से मीनाक्षी नटराजन द्वारा दाखिल किए गए फॉर्म-26 के कारण हुआ। राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेशानुसार, भाजपा (BJP) के उम्मीदवार महेश केवट ने शिकायत दर्ज कराई कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया। जांच में यह शिकायत सही पाई गई और इसे ‘अधूरा शपथपत्र’ मानते हुए निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया।
इसके परिणामस्वरूप, विपक्ष में कोई अन्य उम्मीदवार न होने के कारण भाजपा के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया। इस तकनीकी गलती और पार्टी के भीतर समन्वय की कमी ने कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण सीट छीन ली, जिसके बाद पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।










