मध्य प्रदेश सरकार का निर्णय: दूषित कफ सिरप से पीड़ित बच्चों का पूरा इलाज सुनिश्चित
मध्य प्रदेश सरकार ने उन बच्चों के उपचार का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है, जो दूषित कफ सिरप (Coldrif) के सेवन से किडनी संक्रमण से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों का उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब छिंदवाड़ा में 16 बच्चों की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है, जिसे जहरीली सिरप से जुड़ा माना जा रहा है।
छिंदवाड़ा और बैतूल के बच्चों का इलाज जारी
एक सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण किडनी संक्रमण से प्रभावित कुल नौ बच्चों का इलाज महाराष्ट्र के नागपुर के अस्पतालों में किया जा रहा है। इनमें से सात बच्चे छिंदवाड़ा से और दो बैतूल से हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। इसके लिए नागपुर के अस्पतालों में एक संयुक्त टीम, जिसमें कार्यपालक मजिस्ट्रेट और डॉक्टर शामिल हैं, तैनात की गई है।
संबंधित कदम और प्रतिबंधात्मक उपाय
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, छिंदवाड़ा में 14 बच्चों की मौत की जांच के बीच दो औषधि निरीक्षकों और एक खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप निदेशक को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही, राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला भी किया गया है। छिंदवाड़ा में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर प्रवीण सोनी पर कथित लापरवाही का आरोप है, जबकि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सरकार ने तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी द्वारा निर्मित इस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि नमूनों में अत्यधिक विषैला पदार्थ पाया गया है।









