मंडला में मनेरी हत्याकांड का कठोर फैसला
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के अपर सत्र न्यायालय ने चर्चित मनेरी हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दोषी हरि उर्फ हरीश सोनी को मृत्युदंड की सजा दी है। इस फैसले को न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिन्हा ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए इसे ‘विरल से विरलतम’ अपराध की श्रेणी में रखा। इस जघन्य अपराध में आरोपी ने अपने ही परिवार के छह सदस्यों, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे, निर्दयता से हत्या कर दी थी।
घटना का संक्षिप्त विवरण और आरोपी का शक
यह मामला 15 जुलाई 2020 का है, जब मंडला जिले के बीजाडांडी थाना क्षेत्र के मनेरी गांव में दो भाइयों ने मिलकर अपने परिवार के छह सदस्यों को कुल्हाड़ी और तलवार से मौत के घाट उतार दिया। इस हिंसक हमले में पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए। मृतक और आरोपी दोनों चचेरे भाई थे और उनके बीच लंबे समय से विवाद और बातचीत बंद थी।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी हरि उर्फ हरीश और उसका भाई संतोष सोनी अक्सर बाहर रहते थे, जिससे उनका प्रधानमंत्री आवास योजना का स्वीकृत आवास निरस्त हो गया था। आरोपियों को शक था कि उनके चचेरे भाई, जो उपसरपंच थे, ने ही उनका नाम योजना से हटवाया है। इस शक ने दोनों भाइयों को इस खौफनाक अपराध को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया।
हत्या का कारण और पुलिस की कार्रवाई
घटना के दिन दोनों भाइयों ने तलवार और कुल्हाड़ी लेकर पहले एक दुकान पर हमला किया। फिर वे अपने घर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों पर एक के बाद एक हमला कर दिया। इस दौरान जो भी उनके सामने आया, उसे उन्होंने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस जघन्य अपराध में छह लोगों की जान चली गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपियों ने पुलिस पर भी हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने एक आरोपी को मार गिराया, जबकि हरि उर्फ हरीश सोनी को पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और इसे जिले के सबसे जघन्य अपराधों में गिना गया।
अदालत का फैसला और न्याय का संदेश
अदालत ने इस मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और तर्कों को मानते हुए इसे ‘विरल से विरलतम’ अपराध माना। न्यायालय ने आरोपी हरि उर्फ हरीश सोनी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही, पांच अन्य आरोपियों को जानलेवा हमले के मामले में आजीवन कारावास की सजा भी दी गई।
फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में भारी गहमागहमी देखी गई। पीड़ित परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, और मृत्युदंड की सजा सुनने के बाद उनके चेहरे पर संतोष और न्याय की उम्मीद साफ झलक रही थी। इस निर्णय के साथ ही चार साल पुराने इस जघन्य हत्याकांड का न्यायिक अंत हुआ, और अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अमानवीय अपराध के लिए कठोरतम सजा ही समाज में कानून का संदेश पहुंचा सकती है।











