मध्य प्रदेश ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण में नई मिसाल कायम की
मध्य प्रदेश ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप पर प्रदेश ने सबसे अधिक दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों का रजिस्ट्रेशन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। अब तक राज्य में कुल 34 लाख 45 हजार 439 पन्नों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जिनमें से 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। शेष पांडुलिपियों का सत्यापन प्रक्रिया में है, जो ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलीं अनमोल प्राचीन सामग्री
3 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश ने अपने डिजिटल अभियान के तहत इन पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन किया है। इन पांडुलिपियों का वेरिफिकेशन भी तेजी से किया जा रहा है, जिससे शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों को इन ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुंच आसान हो गई है। इस डिजिटल पहल के दौरान विभिन्न जिलों से ऐसी दुर्लभ प्राचीन सामग्री प्राप्त हुई है, जो शोधकर्ताओं को हैरान कर रही है। इन पांडुलिपियों में भारतीय संस्कृति, इतिहास और भूगोल से जुड़ी अनमोल जानकारियां छुपी हैं।
प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति का संरक्षण
टीकमगढ़ जिले में 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का नक्शा मिला है, जो प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाता है। इस हाथ से बने नक्शे के केंद्र में एक सुंदर वृत्ताकार संरचना है, जिसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और प्राचीन क्षेत्रों को बारीकी से उकेरा गया है। वहीं पन्ना जिले में वर्ष 1591 में रचित ‘रसिक प्रिया’ नामक हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है, जिसमें राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों के माध्यम से काव्यशास्त्र और नायिका-भेद को समझाया गया है। बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना ‘श्रीमद्भागवत महापुराण’ का हस्तलिखित ग्रंथ भी सुरक्षित किया गया है। इसके अलावा दतिया जिले में राजा उद्दोत सिंह के शासनकाल का एक ऐतिहासिक ताम्रपत्र अभिलेख प्राप्त हुआ है, जिसमें विक्रम संवत 1828 अंकित है।










