कूनो नेशनल पार्क में चीता माताओं का संघर्ष और सफलता
मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क ने मदर्स-डे के अवसर पर एक विशेष शॉर्ट फिल्म जारी की है, जो चीता माताओं के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित है। यह फिल्म भारतीय जंगलों में नई पीढ़ी के चीता बसाने में इन माओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले तीन वर्षों में भारत में चीता आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और अब यह संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। इस सफलता में मुख्य योगदान मादा चीता का रहा है, जिन्होंने अपने शावकों को जन्म देकर इस मिशन को साकार किया है।
भारत में चीता प्रजनन और नई पीढ़ी का विकास
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाई गई छह मादा चीता में से पांच ने शावकों को जन्म दिया है, जबकि भारत में जन्मी दो मादा चीता ने भी सफलतापूर्वक प्रजनन कर अपने शावकों को जन्म दिया है। पिछले तीन वर्षों में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 37 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। इन माताओं ने न केवल खुद को भारतीय पर्यावरण में ढाला है, बल्कि अपने शावकों को शिकार करने और सुरक्षा के उपाय भी सिखाए हैं। वर्तमान में कूनो और उसके आसपास के लगभग पांच हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चीते अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।
चीता संरक्षण में नई दिशा और भविष्य की योजनाएँ
फिल्म में दिखाया गया है कि चीता माताएँ और उनके शावक किस तरह संघर्ष कर अपने जीवन को सुरक्षित बनाने में जुटे हैं। विभिन्न देशों से लाए गए चीते आनुवंशिक विविधता को मजबूत कर रहे हैं, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा कम हुआ है। दूसरी पीढ़ी के शावकों का आना इस बात का संकेत है कि भारत में चीता आबादी धीरे-धीरे आत्मनिर्भर हो रही है। कूनो प्रबंधन अब नए क्षेत्रों में भी चीता बसाने की योजना बना रहा है, जहां दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और भारत में जन्मे चीते मिलकर एक संयुक्त समूह बनाएंगे। इस सफलता में कूनो के फील्ड स्टाफ, डॉक्टरों और वन अधिकारियों की मेहनत को भी सराहा गया है, जिनकी सतत निगरानी और प्रयासों से यह अभियान आज इस मुकाम पर पहुंचा है। प्रोजेक्ट चीता के निदेशक ने बताया कि कूनो पार्क में इस परियोजना ने नए आयाम स्थापित किए हैं, और विदेशी धरती से लाए गए चीते नई पीढ़ी को जन्म देकर इस मिशन को सफल बना रहे हैं। मदर्स-डे के इस खास मौके पर हमने मादा चीता और उनके शावकों की ममत्वमयी तस्वीरें प्रस्तुत की हैं।











