कूनो नेशनल पार्क में चीते की देखभाल और खर्च का विवरण
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कूनो नेशनल पार्क और वहां रह रहे चीते की देखभाल से जुड़ी वित्तीय जानकारी सरकार ने प्रस्तुत की। विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने इस विषय में सवाल उठाए, जिनके जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्तमान चीते की संख्या और उनके रखरखाव पर होने वाले खर्च का खुलासा किया।
चीते की संख्या और उनके भोजन की स्थिति पर सरकार का बयान
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि खुले जंगल में रह रहे चीते अक्सर कूनो की सीमा पार कर ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पहुंच जाते हैं। इस दौरान वे ग्रामीणों के बकरियों और मवेशियों का शिकार भी कर लेते हैं। विधायक ने आरोप लगाया कि पार्क के अंदर पर्याप्त भोजन की उपलब्धता न होने के कारण चीते बाहर निकलने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकार ने निगरानी टीम की सक्रियता का हवाला देते हुए इसे प्राकृतिक विचरण बताया।
सड़क दुर्घटना और सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का रुख
दिसंबर 2025 में घाटीगांव हाईवे पर एक चीते की सड़क दुर्घटना में मौत को लेकर सदन में तीखे सवाल उठे। कांग्रेस विधायक ने पूछा कि क्या कूनो स्टाफ और विभागीय अधिकारी चीते की सुरक्षा और भलाई के लिए लापरवाह हैं। सरकार ने लिखित जवाब में माना कि 6 दिसंबर 2025 को हाईवे पर भटकने के बाद एक दुर्घटना में चीते की जान गई। लापरवाही के आरोपों पर सरकार ने अपने अधिकारियों का बचाव किया और कहा कि ट्रैकिंग टीम प्रभावी ढंग से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह घटना महज एक दुर्घटना थी, जिसके लिए किसी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।











