खंडवा जेल में गांधी जयंती पर अनूठी मानवीय पहल
मध्य प्रदेश के खंडवा जिला जेल में गांधी जयंती के अवसर पर एक विशेष और हृदयस्पर्शी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य उन कैदियों के दिलों में बदलाव लाना था, जो वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे हैं और जिनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। इस पहल के तहत, जेल प्रशासन ने उन 120 बंदियों को चुना, जिनके बच्चे 3 से 10 वर्ष की उम्र के हैं, और उन्हें उनके बच्चों से आमने-सामने मुलाकात का अवसर प्रदान किया गया।
बच्चों और पिता के बीच भावुक मिलन का दृश्य
मुलाकात के दौरान जेल के मुलाकात कक्ष को इस तरह सजाया गया था कि बच्चे बिना किसी भय के अपने पिता के साथ खेलते और हंसते नजर आए। बच्चों ने अपने पिता को घोड़ा बनाकर उनकी पीठ पर बैठने का आनंद लिया, और कुछ ने अपने पिता को स्कूल में गरबा सिखाते हुए भी दिखाया। छोटे बच्चों ने अपने पिता के साथ चॉकलेट और गुब्बारे बांटे, जबकि अधिक समझदार बच्चे अपने पिता से पूछते रहे, “पापा आपने ऐसा क्यों किया? सबके पापा घर पर रहते हैं, आप क्यों नहीं?”
मासूमियत ने बदली कैदियों की जिंदगी
इन मासूम सवालों और स्नेहपूर्ण व्यवहार ने सख्त सजा काट रहे कैदियों के दिलों को पूरी तरह से छू लिया। उनके मन में अपने अपराधों के प्रति गहरा पश्चाताप जाग उठा। वे अपने आंसुओं के माध्यम से अपनी पुरानी गलतियों का प्रायश्चित करने लगे और मन ही मन अपराध न करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जेल प्रबंधन ने बंदियों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया।
जेल अधीक्षक देवेंद्र कुमार सारस ने कहा, “गांधी जयंती के इस पावन अवसर पर हमने उन 120 बंदियों को चुना, जो वर्षों से अपने छोटे बच्चों से मिल नहीं सके थे। महात्मा गांधी के ‘अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं’ के सिद्धांत को अपनाते हुए यह मुलाकात कराई गई।” इस अनूठी पहल ने बंदियों में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें अपराध की राह से दूर करने में मदद की है।
मुलाकात के अंत में जब बच्चे अपने पिता से विदा लेने लगे, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। कई बच्चे अगले दिन से शुरू होने वाली परीक्षाओं की चिंता में थे, और उनके पिता ने रुंधे गले से कहा, “किट्टू बेटा, अच्छे से एग्जाम देना, बेस्ट ऑफ लक!” इन अंतिम शब्दों ने वहां मौजूद सभी की आंखें नम कर दीं।










