मध्य प्रदेश पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया पर गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश की चर्चित पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया, जिन्हें पहले ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाता था, अब कानूनी जटिलताओं का सामना कर रही हैं। कटनी की इस सस्पेंड CSP पर हत्या के आरोपी से जुड़े विवादित जमीन सौदे और लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के बाद पुलिस विभाग ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है।
जांच की प्रक्रिया और आरोपों का विस्तार
19 अगस्त को कटनी के कुठला थाने में 37 वर्षीय पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया और उनके दो सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जबलपुर जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) प्रमोद वर्मा ने बताया कि SIT इस मामले की जांच में जबलपुर सिटी की एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) अंजना तिवारी की मदद करेगी।
जमीन सौदे और गिरफ्तारी में देरी का मामला
कटनी के एसपी अभिनय विश्वकर्मा के अनुसार, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब नेहा पच्चीसिया पर आरोप लगा कि उन्होंने हत्या के आरोपी रमेश लोधी की गिरफ्तारी में देरी की। साथ ही, यह भी आरोप था कि आरोपी के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। जांच में पता चला कि आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर उसे डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी।
इसके अतिरिक्त, जबलपुर की ASP अनु बेनीवाल की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लोधी और उनके परिवार की जमीन को सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार 82 लाख रुपये में होना चाहिए था, लेकिन उसे मात्र 18 लाख रुपये में बेच दिया गया। बाजार में इसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस जमीन सौदे में दबाव और भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए नेहा पच्चीसिया को सस्पेंड कर दिया। साथ ही, पुलिस विभाग के छह अन्य अधिकारियों को भी सेवा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में निलंबित किया गया है। इन अधिकारियों में अरुण पाल सिंह, सौरभ सोनी, नरेंद्र पांडे, मटू और केशव शामिल हैं।
नेहा पच्चीसिया के खिलाफ विभागीय जांच भी जारी है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने एक ट्रांसपोर्टर के डंपर ट्रक से पैसे वसूले थे। इस महिला अधिकारी का प्रारंभिक करियर एयर होस्टेस के रूप में था, और बाद में उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग में भी काम किया। गुना में सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के रूप में उनके कार्यकाल में महिलाओं के लिए मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू करने के कारण उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का उपनाम मिला था।









