जबलपुर में विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम का निर्माण
जबलपुर के प्रसिद्ध भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट क्षेत्र में देश का पहला उच्चस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 87 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान कर दी है। यह परियोजना स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इससे न केवल पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।
प्रोजेक्ट की रूपरेखा और प्रमुख विशेषताएं
मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने 18 जनवरी 2024 को मंत्रालय में जियो पार्क की परियोजना रिपोर्ट और डिजाइन का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप निर्माण, संग्रहालय को आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने, और लम्हेटा फॉर्मेशन, रानी दुर्गावती तथा जबलपुर की भू-संस्कृति को प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने प्रकृति आधारित पर्यटन, नेचर स्टे और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी इस परियोजना का अहम हिस्सा बनाने पर बल दिया।
प्रमुख आकर्षण और पर्यटक सुविधाएं
इस परियोजना में लगभग 5745 वर्गमीटर का निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र हरित क्षेत्र के रूप में रखा जाएगा। प्राकृतिक भू-दृश्य और मौजूदा पेड़ों को संरक्षित रखते हुए संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इसमें स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खानपान और पर्यटन सेवाओं में समुदाय की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
म्यूजियम में छह विषयगत गैलरियां और 130 से अधिक प्रदर्शनी शामिल होंगी। इसके साथ ही 3D मॉडलिंग, इंटरैक्टिव टच टेबल, डिजिटल पैनल और इमर्सिव थिएटर जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। परिसर में टाइटेनोसॉर स्क्वायर, डायनासोर पार्क, फॉसिल गार्डन, जियोलॉजिकल मेज, रॉक गार्डन, ट्री-टॉप वॉकवे, ग्लास फ्लोर, नेचर वॉक और व्यूइंग डेक जैसी आकर्षक संरचनाएं भी बनाई जाएंगी।
पर्यटक सुविधाओं में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप, स्थानीय उत्पादों के रिटेल क्षेत्र और ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट भी शामिल हैं। इसके अलावा, पार्किंग और टिकटिंग जैसी आधुनिक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। संग्रहालय में बच्चों, विद्यार्थियों और भू-विज्ञान के शोधार्थियों के लिए विशेष अनुभव आधारित सामग्री भी प्रस्तुत की जाएगी।
लम्हेटा फॉर्मेशन क्षेत्र की विशिष्ट भू-वैज्ञानिक पहचान है, जहां भारत का पहला डायनासोर जीवाश्म टाइटेनोसॉरस इंडिकस (Titanosaurus Indicus) मिला था। इस संग्रहालय में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर मध्यप्रदेश और नर्मदा घाटी के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को सरल और वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश के 13 भौगोलिक क्षेत्रों की भू-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।
भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची में नामांकन और भविष्य में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की संभावना का भी उल्लेख इस परियोजना प्रस्ताव में किया गया है।
पर्यटन, रोजगार और परियोजना का भविष्य
जियो पार्क के निर्माण से जबलपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। 2025 में भेड़ाघाट क्षेत्र में लगभग 10.68 लाख पर्यटक आए थे, और इस परियोजना के पूरा होने पर पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड सेवाएं और अन्य पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलेगा।
भेड़ाघाट पहले से ही मार्बल रॉक्स, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में प्रसिद्ध है। जियो पार्क के बनने से प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन भी विकसित होंगे।
यह परियोजना मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की देखरेख में सितंबर 2026 से फरवरी 2028 के बीच पूरी की जाएगी। इसके लिए लगभग 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई है, और इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।










