इंदौर में रानी सराय का पर्यावरणीय संकट और पेड़ संरक्षण आंदोलन
इंदौर की ऐतिहासिक पहचान और हरियाली का प्रतीक रानी सराय क्षेत्र को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने जोरदार संघर्ष शुरू कर दिया है। अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के निर्माण के कारण यहां मौजूद सैकड़ों पुराने पेड़ों को काटने का खतरा मंडरा रहा है। इन लोगों ने इस क्षेत्र को अपना घर बनाकर विरोध प्रदर्शन किया है।
जनहित पार्टी का सक्रिय विरोध और पेड़ संरक्षण प्रयास
इस मुद्दे पर मुखर आवाज उठाते हुए जनहित पार्टी ने परिसर में मौजूद 225 पेड़ों का विस्तृत पंचनामा तैयार किया, जिसमें पेड़ों की प्रजाति, लंबाई और चौड़ाई का विवरण शामिल है। इसके बाद पार्टी ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभाग आयुक्त और इंदौर सांसद शंकर लालवानी के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मेट्रो स्टेशन को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की गई। साथ ही रीगल चौराहे पर पोस्टर और बैनर के माध्यम से आम जनता को इस योजना के प्रति जागरूक किया गया।
विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण का संघर्ष जारी
जनहित पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि अभी तक नगर निगम से मेट्रो निर्माण कंपनी को पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली है, फिर भी निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। 13 दिनों से परिसर में ही रसोई और रैनबसेरा चल रहा है, जहां कार्यकर्ता भोजन बना रहे हैं और पेड़ों की छाया में रात्रि विश्राम कर रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन बिना पर्यावरणीय नुकसान के नहीं।
रानी सराय के पेड़ हजारों पक्षियों का घर हैं, और इनकी कटाई से शहर का ईको-सिस्टम बुरी तरह प्रभावित होगा। पार्टी का सुझाव है कि तकनीकी बदलाव या स्टेशन को कुछ मीटर दूर शिफ्ट कर इन पेड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इस संघर्ष में अभी भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास जारी हैं, ताकि इंदौर की हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।











