मध्यप्रदेश में IAS अधिकारी नागार्जुन बी गौड़ा पर नए आरोप
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में तैनात IAS अधिकारी नागार्जुन बी गौड़ा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। RTI कार्यकर्ता आनंद जाट ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बार का आरोप है कि गौड़ा ने कथित तौर पर रिश्वत के पैसे से भोपाल में चार एकड़ जमीन खरीदी है। इस खबर ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
रिश्वत से जमीन खरीदने का आरोप और सरकारी प्रतिक्रिया
RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने आरोप लगाया है कि गौड़ा ने बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर जमीन खरीदी है। उन्होंने बताया कि इस चार एकड़ जमीन का बाजार मूल्य लगभग दो करोड़ रुपए प्रति एकड़ है, यानी कुल कीमत करीब आठ करोड़ रुपए बनती है। जाट ने यह भी कहा कि इस मामले में अब ईओडब्ल्यू (Economic Offenses Wing) में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
वहीं, गौड़ा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए यदि कोई प्रॉपर्टी खरीदी जाती है, तो उसके लिए सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने भी अनुमति लेकर ही भोपाल में जमीन खरीदी है।
जमीन की कीमत और दस्तावेजों की जांच
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, भोपाल के फंदा ब्लॉक के फतेहपुर डोबरा गांव में स्थित इस चार एकड़ जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत लगभग 94 लाख 76 हजार रुपए है। लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक, इस जमीन को गौड़ा और भोपाल निवासी रोहित शर्मा ने मिलकर करीब 90 लाख रुपए में खरीदा है। गौड़ा के हिस्से में दो एकड़ जमीन आएगी, और रजिस्ट्री के दौरान उन्होंने 45 लाख रुपए में दो एकड़ जमीन खरीदी है।
इस मामले में खंडवा जिला पंचायत के सीईओ गौड़ा ने कहा कि जब भी वे प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो वह शासन से अनुमति लेकर ही ऐसा करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मार्च 2024 में हरदा जिले में सड़क निर्माण कंपनी पाथ इंडिया को अवैध खनन मामले में क्लीन चिट देने के बाद यह जमीन खरीदी गई है।
गंभीर आरोप और विवादित फैसले
आनंद जाट ने आरोप लगाया है कि गौड़ा ने रिश्वत के पैसे से करीब 10 करोड़ रुपए की रिश्वत ली है। उन्होंने यह भी कहा कि खनन मामले में कंपनी के वकील की बात मानते हुए, शासन के आदेश को नजरअंदाज किया गया। आरोप है कि खनन की सही माप के लिए दोबारा जांच नहीं कराई गई और तहसीलदार के पास उपलब्ध नाप के मीटर का बहाना बनाकर कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे शासन को लगभग 51 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है, और जांच की मांग तेज हो गई है।











