उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों में ‘जंगलराज’ का मुद्दा फिर से उभर सकता है
हाल ही में संपन्न बिहार चुनाव ने एक बार फिर ‘जंगलराज’ के नाम पर वोट मांगने की परंपरा को उजागर किया है। अब ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भी 2027 के विधानसभा चुनावों में इसी तरह का माहौल देखने को मिल सकता है। बिहार में बीते दो दशकों से ‘जंगलराज’ का जिक्र चुनावी भाषणों और प्रचार में आम बात रही है, और अब यूपी में भी इसकी झलक देखने को मिल सकती है।
योगी आदित्यनाथ का संकेत और यूपी चुनाव की रणनीति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) के 36वें स्थापना दिवस समारोह में अपने भाषण के दौरान संकेत दिए हैं कि आगामी चुनावों में ‘जंगलराज’ या इसी तरह के शब्दों का प्रयोग हो सकता है। उन्होंने अपने भाषण में बीते यूपी की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 1989 से 1998 तक यहां औद्योगिक गतिविधियां लगभग ठप थीं, हिंसा और अराजकता का माहौल था, और सरकार का कोई विजन नहीं था। योगी ने कहा कि उस समय गोरखपुर का खाद कारखाना भी बंद हो चुका था।
बिहार की चुनावी रणनीति का असर और यूपी में संभावित बदलाव
योगी आदित्यनाथ का भाषण बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शैली की तरह लग रहा था, जिसमें वह लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल के किस्से सुनाते हैं। योगी ने यूपी में पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जाति, भाषा और तुष्टीकरण की नीति से अराजकता फैलती थी। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार के आने के बाद से अपराध पर लगाम लगी है, गुंडागर्दी खत्म हुई है और प्रदेश अब उत्सव का माहौल बन गया है।
बिहार चुनाव के नतीजे और बीजेपी की रणनीति को देखते हुए, यह संभावना है कि यूपी में भी ‘जंगलराज’ का मुद्दा चुनावी जंग का हिस्सा बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार में ‘कट्टा सरकार’ और ‘जंगलराज’ का जिक्र किया था, और संकेत दिए हैं कि ऐसी स्थिति फिर से नहीं आएगी। इस तरह के भाषण और प्रचार से यह साफ हो रहा है कि बीजेपी और उसके नेता आगामी चुनावों में इसी मुद्दे का इस्तेमाल कर सकते हैं।











