इंदौर में दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हाल ही में सामने आए पानी प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रभावित लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करे और इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
इंदौर की बेंच ने सरकार से दो दिनों के भीतर यानी 2 जनवरी तक स्थिति का स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यह कदम शहर के सबसे स्वच्छ शहर होने का दावा करने वाले इंदौर में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता को दर्शाता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, इस पानी प्रदूषण से अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि जिला प्रशासन ने चार मौतों की पुष्टि की है।
स्वास्थ्य संकट का विस्तार और सरकारी प्रतिक्रिया
पिछले एक हफ्ते में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण दस्त और उल्टी के प्रकोप से 1100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से लगभग 150 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस पानी प्रदूषण के कारण अब तक सात मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से चार की पुष्टि जिला मजिस्ट्रेट शिवम वर्मा ने की है।
शहर के 27 अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 149 है, और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस संकट के मद्देनजर हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे प्रभावित नागरिकों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करें और इस गंभीर समस्या की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अधिकारियों की लापरवाही और जनता में चिंता
याचिका में विशेष रूप से मांग की गई थी कि मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी के हर निवासी को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। पिछले सप्ताह में ही इस पानी प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों का कहर बढ़ा है, जिससे प्रभावित लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है।
इंदौर के महापौर और जिला प्रशासन दोनों ही इस संकट से निपटने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन जनता में पानी की गुणवत्ता को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है। हाई कोर्ट के निर्देश इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो शहर के स्वास्थ्य और स्वच्छता मानकों को सुधारने की दिशा में मदद करेंगे।











