गुना हवाला कांड का खुलासा: सच्चाई क्या है?
गुना जिले में सामने आए हवाला कांड ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था। इस मामले में विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और पुलिस कप्तान का भी तबादला कर दिया। शुरुआत में माना जा रहा था कि करोड़ों रुपये के हवाला कारोबार का खुलासा हुआ है, लेकिन जब असली तथ्यों का पता चला, तो स्थिति पूरी तरह से बदल गई।
मामले की जड़ में एक व्यापारी की कहानी थी, जिसने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। परंतु, जब मसाला व्यापारी दक्षित पटेल ने एक न्यूज चैनल से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि उनके पास केवल 9.50 लाख रुपये थे, जो गुजरात (Gujarat) से दिल्ली (Delhi) भेजे गए थे। जब दिल्ली में दूसरा व्यापारी नहीं मिला, तो उनका ड्राइवर स्कॉर्पियो (GJ05 RK 9351) से पैसे लेकर इंदौर लौट रहा था। इसी दौरान गुना की रूठियाई पुलिस चौकी के पास टोल टैक्स पर जांच के दौरान गाड़ी को रोका गया।
मामले का असली सच और व्यापारी का बयान
ड्राइवर ने बताया कि पुलिस ने जब पैसे की संख्या पूछी, तो उन्होंने बताया कि बैग में केवल 9.50 लाख रुपये हैं। बाद में जब इंदौर पहुंचकर बैग की गिनती की गई, तो उसमें 8.50 लाख रुपये ही पाए गए। गलती से पैसे गिनने में त्रुटि हो गई थी, जिसके बाद व्यापारी ने गुना लौटकर एसपी अंकित सोनी से मुलाकात की और एक लाख रुपये की कमी का जिक्र किया।
व्यापारी का कहना है कि उन्होंने कभी करोड़ों रुपये का हवाला कारोबार नहीं किया। वे तो बस गुजरात से मध्यप्रदेश में मसाले खरीदने आते हैं। उनके सहयोगी अनिल पटेल ने भी स्पष्ट किया कि हर गुजराती हवाला कारोबारी नहीं है। उनका कहना है कि अक्सर लोग गलतफहमी में पड़ जाते हैं कि गुजराती का मतलब हवाला करने वाला है।
सच्चाई का पता कैसे चला और जांच की प्रक्रिया
जब व्यापारी रूठियाई थाने पहुंचे, तो पुलिस ने कोई गलती नहीं पाई। बैग में शुरू से ही एक लाख रुपये कम थे, और व्यापारी ने कोई शिकायत नहीं की। दो दिन बाद जब यह खबर फैली कि हवाला कांड में उनका नाम आ रहा है और पुलिस अधीक्षक का तबादला हो गया है, तो वे खुद गुजरात से गुना आए और अपने बयान दर्ज कराए।
ड्राइवर मौलिक ने भी बताया कि जब वह गुना से गुजर रहा था, तो पुलिस ने उसकी गाड़ी रोकी थी, लेकिन बाद में छोड़ दिया। उनका कहना है कि पुलिस से कोई शिकायत नहीं है।
मामले की जांच और असली स्थिति
व्यापारियों के बयान के आधार पर अब सवाल उठ रहे हैं कि बिना जांच के ही पुलिस अधिकारी का तबादला क्यों कर दिया गया। क्या वजह थी कि तुरंत ही एसपी अंकित सोनी का स्थानांतरण कर दिया गया। यह भी स्पष्ट हो गया कि करोड़ों रुपये का हवाला कारोबार का दावा महज एक अफवाह था। जब कोई फरियादी ही नहीं था, तो पुलिस ने बिना जांच के ही इस मामले को क्यों जोड़ दिया? इस पूरे प्रकरण की जांच ट्रेनी आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ कर रहे हैं। उन्होंने व्यापारियों के बयान दर्ज किए हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंप दी है। साथ ही, DIG अमित सांघी ने भी गुना पहुंचकर मामले की बारीकी से जांच की बात कही है।











