मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों में कथित भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। नईगढ़ी ब्लॉक के खटखरी गांव में लगभग 30 फीट ऊंची पानी की टंकी पहली बार पानी भरते ही ढह गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने PHE विभाग के तीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जल परियोजना में अनियमितताओं का खुलासा
यह मामला वर्ष 2021-22 में शुरू हुई जल जीवन मिशन की योजना से जुड़ा है। नईगढ़ी ब्लॉक के कई गांवों में ओवरहेड टैंक, संपवेल, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन के लिए ‘मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी’ को लगभग 3 करोड़ 85 लाख रुपये का ठेका दिया गया था। हालांकि, नौ महीने का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही यह काम पांच वर्षों में भी पूरा नहीं हो पाया। साथ ही, इस दौरान पूरे भुगतान का भी दावा किया गया है।
जांच में सामने आईं गंभीर खामियां और भ्रष्टाचार के संकेत
ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला है कि कई स्थानों पर कार्य बिना पूर्ण हुए ही विभाग ने भुगतान कर दिया। योजना के दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में भी भारी अंतर पाया गया। खटखरी गांव में बनाई गई ओवरहेड टंकी मार्च 2026 में पहली बार पानी भरने के बाद ही ढह गई, जिससे आसपास मलबा बिखर गया। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं, खासकर मानकों का उल्लंघन और कम क्षमता वाली सरियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा, योजना के कई हिस्सों में अनियमितताएं भी उजागर हुई हैं। करह उर्फ खैरागढ़ गांव में 740 घरेलू नल कनेक्शन का दावा किया गया था, लेकिन जांच में घरों में नल की टोंटी और फिटिंग नहीं मिली। साथ ही, पांच मोटर पंप लाने का प्रावधान था, लेकिन निरीक्षण के दौरान केवल एक ही मोटर मिली। कई स्थानों पर पाइपलाइन अधूरी पड़ी मिली और घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचाए गए।
ईओडब्ल्यू का आरोप है कि इन कमियों के बावजूद विभागीय स्तर पर निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। ठेकेदार शिवेंद्र तिवारी, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पांडेय और एपी तिवारी को दोषी मानते हुए भ्रष्टाचार के विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।










