दतिया विधानसभा सीट पर चुनावी विवाद और कानूनी जंग
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट फिर से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। उपचुनाव जीतकर विधायक बने कांग्रेस नेता घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बीजेपी के दीपक बेलपत्री ने वकील शिवम गौतम के माध्यम से इस याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने अपने चुनावी हलफनामे में 1991 में दर्ज एक FIR का उल्लेख नहीं किया।
1991 की FIR का मामला और चुनावी हलफनामे का विवाद
यह विवाद मई 1991 के एक मामले से जुड़ा है, जब दतिया में राजीव गांधी की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम हुआ था। उस समय पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। याचिका में कहा गया है कि चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों का विवरण देना अनिवार्य है, और इस मामले का उल्लेख नहीं करने पर उनके निर्वाचन पर प्रभाव पड़ सकता है।
विधायक का पक्ष और आगामी कानूनी प्रक्रिया
विधायक घनश्याम सिंह ने इस याचिका को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका दावा है कि उन्हें 1991 के किसी भी मामले की जानकारी नहीं थी और पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले लोगों के राजनीतिक संबंध उनके विरोधियों से जुड़े हैं। इस मामले में अभी अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है, और हाईकोर्ट ही तय करेगा कि इस विवाद का उनके विधायक पद पर क्या असर पड़ेगा।









