मध्य प्रदेश में महिला पुलिस अधिकारियों की अलग-अलग छवि
मध्य प्रदेश की पुलिस सेवा में कार्यरत दो महिला अधिकारियों की चर्चा इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन दोनों की छवि और कार्यशैली पूरी तरह से भिन्न हैं। एक अधिकारी ने पुलिस विभाग की छवि को धूमिल किया है, जबकि दूसरी ने अपने सूझ-बूझ और समझदारी से समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है।
सिवनी की CSP पूजा पांडेय का विवादित मामला
सिवनी जिले में तैनात CSP पूजा पांडेय पर हवाला कारोबारियों से लगभग तीन करोड़ रुपये की लूट का आरोप लगा है। घटना बीते अक्टूबर की शुरुआत में सिलादेही के जंगल में हुई, जब पुलिस ने जालना से जालना जा रही हवाला की रकम को चेकिंग के दौरान पकड़ा। लेकिन, आरोप है कि पूजा पांडेय ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस रकम को हड़प लिया।
इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। डीजीपी कैलाश मकवाना के आदेश पर पूजा पांडेय को निलंबित कर दिया गया। साथ ही, उनके खिलाफ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती और अपहरण के गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने ड्राइवर से मारपीट की और नकदी जब्त करने के बजाय इसे वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित नहीं किया।
पुलिस की कार्रवाई और आरोप
पूजा पांडेय सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया है, और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि को धूमिल किया है और जनता में पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्वालियर की CSP हिना खान का सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण
वहीं, ग्वालियर की CSP हिना खान ने अपने कार्यकाल में जातीय तनाव के बीच समझदारी का परिचय दिया है। उन्होंने विवादित टिप्पणी के बाद भी शांति बनाए रखने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एडवोकेट अनिल मिश्रा ने अपने घर के बाहर बाबा साहेब आंबेडकर पर टिप्पणी की, जिससे दलित और सवर्ण समुदाय के बीच तनाव बढ़ गया। इस तनाव के बीच, हिना खान ने सूझबूझ दिखाते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए, जिससे यह संदेश गया कि वह किसी भी धर्म का विरोध नहीं करतीं।
उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है, और वीडियो वायरल होने के बाद उनकी छवि और भी मजबूत हुई है। प्रशासन ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर 4000 पुलिस बल तैनात किया है और आंदोलन पर रोक लगा दी है।










