इंदौर में दूषित पानी से हुई त्रासदी पर मुख्यमंत्री का कड़ा कदम
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल के कारण हुई स्वास्थ्य आपदा पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत ही सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में, जिसमें मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई और राहत प्रयास तेज
मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम के आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अपर आयुक्त को तुरंत ही इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस लेने का आदेश भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आवश्यक पदों पर तुरंत प्रभाव से नियुक्ति करने का भी निर्देश दिया है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया था।
स्वास्थ्य संकट और जांच प्रक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में युद्धस्तर पर राहत और स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया है। अब तक, 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। अस्पतालों में कुल 272 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल चुकी है। वर्तमान में 201 मरीज अस्पताल में हैं, जिनमें से 32 आईसीयू में हैं। सभी मरीजों को मुफ्त में उच्चतम स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौतों की संख्या को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। प्रशासन ने केवल चार मौतों की पुष्टि की है, जबकि मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने दस मौतों की जानकारी दी है। वहीं, स्थानीय निवासियों का कहना है कि छह महीने के एक बच्चे समेत 14 लोग जान गंवा चुके हैं।
मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हो गया था, जिससे इलाके में बीमारी फैलने लगी। पिछले नौ दिनों में भागीरथपुरा में 1400 से अधिक लोग उल्टी और डायरिया से प्रभावित हुए हैं।









