मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में शिक्षक की अनूठी विदाई
छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के धोबीवाड़ा गांव में एक शिक्षक की सेवानिवृत्ति पर ऐसी विदाई दी गई, जिसने सभी को भावुक कर दिया। प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक मेघराज पराड़कर के रिटायरमेंट के अवसर पर ग्रामीणों, छात्रों और स्कूल स्टाफ ने मिलकर एक अनूठा सम्मान दिखाया, जो हर किसी के दिल को छू गया।
इस खास पल में शिक्षक को फूलों से सजे रथ पर बैठाया गया और पूरे गांव में बैंड-बाजे के साथ घुमाया गया। यह समारोह एक उत्सव की तरह था, जिसमें ग्रामीण नाचते-गाते चल रहे थे। स्कूल के बच्चे और शिक्षक भी फूलों की बारिश कर अपने प्रिय शिक्षक को विदाई दे रहे थे। इस आयोजन का नेतृत्व जनपद सदस्य हरीश उईके ने किया, और बड़ी संख्या में गांव के गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं, स्थानीय प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद थे।
शिक्षक की सेवा और भावुक विदाई का माहौल
मेघराज पराड़कर की पहली नियुक्ति 1 अक्टूबर 1987 को इसी स्कूल में हुई थी। उन्होंने अपने 38 वर्षों से अधिक के सेवा काल में बच्चों को निष्ठा, अनुशासन और शिक्षा के महत्व का पाठ पढ़ाया। अपने करियर के अंतिम दिन उन्होंने कहा, “मुझे बहुत खुशी हो रही है कि इतने लोग मेरे सम्मान में जुटे हैं। शायद 26 जनवरी और 15 अगस्त पर भी इतनी भीड़ नहीं होती।” उन्होंने यह भी अपील की कि माता-पिता अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें, क्योंकि बच्चों की उपस्थिति ही गांव के उज्जवल भविष्य की कुंजी है।
उनकी इस भावुक अपील और विदाई के दृश्य ने सभी को यह सिखाया कि शिक्षक समाज में सिर्फ पढ़ाने वाला ही नहीं, बल्कि संस्कार और सम्मान की नींव भी रखता है। यह आयोजन न केवल एक सम्मान था, बल्कि शिक्षकों के प्रति समाज की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक भी था।
गांव में शिक्षक की यादगार विदाई समारोह
शिक्षक को फूलों की मालाओं से सजाया गया और उनकी गाड़ी को दूल्हे की तरह सजाया गया। पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल था। इस समारोह में शामिल सभी लोगों ने मिलकर शिक्षक के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। यह आयोजन यह दर्शाता है कि एक शिक्षक का सम्मान और उसकी भूमिका समाज में कितनी महत्वपूर्ण है।











