सीबीआई की चार्जशीट में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का खुलासा
लखनऊ से कानपुर तक बनने वाले एक्सप्रेसवे की निर्माण कंपनी PNC Infratech की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। हाल ही में सीबीआई (Central Bureau of Investigation) की विशेष अदालत में इस कंपनी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।
सीबीआई ने वर्ष 2024 में झांसी-खजुराहो हाईवे के निर्माण से जुड़ी रिश्वतखोरी के मामले में NHAI (National Highways Authority of India) के एक अधिकारी और PNC Infratech के कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। अब इस मामले में जांच के आधार पर चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की गई है।
रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे
झांसी-खजुराहो हाईवे रिश्वतखोरी मामले में दाखिल की गई चार्जशीट में NHAI के अधिकारियों और PNC इंफ्राटेक कंपनी के बीच गहरी मिलीभगत का खुलासा हुआ है। इस दस्तावेज में यह भी सामने आया है कि रिश्वत की रकम प्रोजेक्ट की NOC (No Objection Certificate), कार्य का हैंडओवर और अंतिम बिल पास कराने के बदले में दी गई थी।
जांच एजेंसी ने छतरपुर (Chhatarpur), लखनऊ (Lucknow), कानपुर (Kanpur), आगरा (Agra) और गुरुग्राम (Gurgaon) जैसे शहरों में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान डिजिटल उपकरण और रिश्वतखोरी से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
PNC इंफ्राटेक की विवादित परियोजना और भ्रष्टाचार का मामला
PNC इंफ्राटेक वह कंपनी है जिसने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है। यह एक्सप्रेसवे पिछले महीने ही जनता के लिए खोल दिया गया था, लेकिन महज एक महीने के भीतर ही इसमें बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं।
सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने इस निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर इस मुद्दे को उठाया है, जिसमें दिखाया गया है कि सड़क पर मरम्मत के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार, निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है, जो न केवल परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगा रही है।









