भोपाल वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट में बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रस्तावित 35 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न बाईपास (Western Bypass) परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस परियोजना की लागत लगभग 3200 करोड़ रुपये है, और इसे लेकर एक प्रमुख भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ने आरोप लगाया है कि देश के करीब 50 वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों ने अपने प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मंजूरी से पहले ही करोड़ों रुपये की जमीनें खरीद ली थीं। संगठन ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और परियोजना को रद्द करने की मांग की है।
प्रोजेक्ट से पहले ही जमीन खरीदने का सनसनीखेज खुलासा
सिस्टम परिवर्तन अभियान (SPA) के अध्यक्ष और रिटायर्ड भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी आजाद सिंह डबास ने पीटीआई से बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने बताया कि अप्रैल 2022 में, लगभग 50 IAS और IPS अधिकारियों ने भोपाल के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी। यह जमीन उस समय 5.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी, जबकि उसकी बाजार कीमत लगभग 7.78 करोड़ रुपये थी।
भूमि खरीद और परियोजना मंजूरी के बीच का संबंध
डबास का आरोप है कि इस जमीन की खरीद 16 महीने पहले ही हो चुकी थी, और इसके बाद अगस्त 2023 में इस वेस्टर्न बाईपास परियोजना को औपचारिक मंजूरी मिली। उन्होंने यह भी कहा कि जून 2024 में इस जमीन का उपयोग कृषि से आवासीय क्षेत्र में बदलने का डायवर्जन भी नियमों को तोड़कर किया गया। संगठन का दावा है कि इस प्रक्रिया के कारण उस जमीन की कीमत आज 55 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पहले केवल 5.5 करोड़ रुपये की थी।
डबास ने यह भी आरोप लगाया कि इस सड़क परियोजना का निर्माण जनता की सुविधा के बजाय अधिकारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट तीन बार बदला गया, और हर बार रास्ता इस तरह से घुमाया गया कि यह खरीदी गई जमीन के पास से होकर गुजरता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि 2013 से 2016 बैच के कई अधिकारियों ने अपनी पत्नियों और बच्चों के नाम पर बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं, और नियमों का उल्लंघन कर निर्माण कार्य भी कराए गए हैं।









