मध्य प्रदेश के बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला सामने आया
बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में हाल ही में बच्चों की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। इन मौतों का कारण संक्रामक बीमारियों को माना जा रहा है, जिनसे प्रभावित कई परिवारों ने प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। इस घटना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता का दौरा और स्वास्थ्य स्थिति का जायजा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कन्वीनर अभिजीत दिपके ने बालाघाट के अडोरी, कोरका और बोंडारी जैसे गांवों का दौरा किया। उन्होंने इन इलाकों में मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया और बच्चों की मौत से जुड़ी परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। इस दौरे का मकसद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करना और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करना था।
हाई कोर्ट के नोटिस के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह दौरा उस समय हुआ जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस उन बच्चों की मौत के मामलों में जारी किया गया था, जिनकी संख्या 30 से अधिक बताई जा रही है। आरोप था कि जिले में अस्पताल भीड़भाड़ से भरे हुए हैं, पीने का पानी प्रदूषित है और पोषण की कमी है। इस मामले में PIL के माध्यम से यह भी आरोप लगाया गया था कि बच्चों को सही इलाज नहीं मिल रहा है और अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।









