मध्य प्रदेश से केदारनाथ तक अनोखी पदयात्रा का सफर
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के निवासी 23 वर्षीय निर्मल उइके और उनके 22 वर्षीय मित्र तुलेंद्र मरावी इन दिनों अपनी विशेष यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। दोनों मित्र 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर बालाघाट से केदारनाथ धाम के लिए निकले। इस यात्रा के दौरान निर्मल पूरी श्रद्धा से दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि तुलेंद्र अपने मित्र के साथ पैदल चलकर उनके सामान और जिम्मेदारी का ध्यान रख रहे हैं। यह लगभग 1450 किलोमीटर लंबी कठिन यात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल भगवान भोलेनाथ के दर्शन ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश फैलाना भी है। अब तक इस यात्रा के 143 दिन पूरे हो चुके हैं और दोनों मित्र लगभग 600 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं।
यात्रा का उद्देश्य और सामाजिक संदेश
मंगलवार की रात को उनकी यह यात्रा झांसी (Jhansi) पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने इस अद्भुत यात्रा को देखकर उनकी प्रशंसा की और विश्वास के मजबूत बंधन को बनाए रखने के लिए प्रार्थना की। निर्मल उइके ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में निजी क्षेत्र में वर्ष 2024-25 तक नौकरी की योजना बनाई थी। लेकिन 2024 में उनके मन में केदारनाथ यात्रा का विचार आया, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने लगभग डेढ़ वर्ष की तैयारी की। महाशिवरात्रि के दिन उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत की।
सामाजिक जागरूकता और युवाओं का संदेश
निर्मल ने यह भी बताया कि इससे पहले वे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय थे। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि यदि धार्मिक यात्रा के साथ सामाजिक संदेश भी जोड़ा जाए, तो अधिक से अधिक लोगों तक सकारात्मक सोच पहुंचाई जा सकती है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना, गौशालाओं और वृद्धाश्रमों की सहायता करना, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना और विश्व में शांति की कामना करना है। उनका मानना है कि युवाओं को अपने भविष्य के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए, और यही संदेश वे इस यात्रा के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं।











