AIIMS भोपाल में जटिल श्वसन रोगों का सफल उपचार
भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग ने दो गंभीर मरीजों को मौत के मुंह से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। इन जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को अंजाम देने वाली टीम ने उन तकनीकों का प्रयोग किया है, जो अब तक केवल देश के कुछ प्रमुख अस्पतालों में ही संभव थीं।
एक मरीज का मामला था जिसमें फेफड़ों में धूल के जमा होने से ‘पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटिनोसिस’ जैसी स्थिति बन गई थी। फेफड़ों की वायु थैलियों में गाढ़ा पदार्थ जमा होने के कारण वे लगभग निष्क्रिय हो चुके थे। डॉक्टरों ने ‘होल लंग लैवेज’ (Whole Lung Lavage) नामक तकनीक का इस्तेमाल कर फेफड़ों की गहरी सफाई की, जिससे ऑक्सीजन का स्तर तुरंत ही बेहतर हो गया।
मरीजों के जीवन को बचाने वाली अत्याधुनिक तकनीकें
इसके अलावा, एक कैंसर मरीज के मुख्य श्वसन मार्ग में ट्यूमर इतना बढ़ गया था कि एक फेफड़ा पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका था। इस स्थिति में ब्रोंकोस्कोपिक डिबल्किंग के माध्यम से ट्यूमर को हटा दिया गया। फिर श्वसन मार्ग को खुला रखने के लिए एक Y-आकार का मेटल स्टेंट डाला गया, जिससे मरीज का फेफड़ा फिर से सक्रिय हो गया।
इन सफलताओं में एम्स भोपाल के एनेस्थीसिया और कार्डियोथोरासिक सर्जरी (CTVS) विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन नई तकनीकों से मध्य प्रदेश में सिलिकोसिस और श्वसन मार्ग के कैंसर के मरीजों के लिए बेहतर इलाज संभव हो पाया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में नई उम्मीदें और आगे का रास्ता
इन जटिल ऑपरेशनों से यह स्पष्ट हो गया है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का प्रयोग कर गंभीर श्वसन रोगों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। इससे न केवल मरीजों की जान बच रही है, बल्कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। अब अधिक से अधिक मरीज इन उन्नत तकनीकों का लाभ उठा सकते हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है।











