ASI संदीप कुमार का खुलासा: भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव के आरोप
ASI संदीप कुमार ने अपने वीडियो और नोट में हरियाणा पुलिस महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरन कुमार ने अपने जीवन का अंतिम कदम उठाने से पहले कई बड़े खुलासे किए हैं, जिनमें राजनीतिक और जातीय ताकतों का संरक्षण प्राप्त करने का भी जिक्र है। संदीप ने अपने बयान में कहा कि पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में केवल गिरफ्तारी से बचने के लिए झूठा आत्महत्या नोट तैयार किया, ताकि राजनीतिक रंग और जातिगत आयोग का सहारा लिया जा सके।
भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण का खुलासा
संदीप कुमार ने अपने वीडियो में आरोप लगाया कि आईपीएस पूरन कुमार ने सदर थाना में हुए मर्डर केस में रिश्वत ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि राव इंद्रजीत सिंह की रक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये की डील हुई थी। संदीप का दावा है कि पूरन कुमार की भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और वह अपने जाति के भ्रष्ट अफसरों को संरक्षण देते थे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ईमानदार अधिकारियों को साइडलाइन कर दिया गया था।
जातिगत भेदभाव और पुलिस महकमे में शोषण
संदीप कुमार ने अपने नोट में बताया कि रोहतक रेंज में तबादले के बाद पूरन कुमार ने अपने जाति के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को आईजी दफ्तर में तैनात किया, जबकि ईमानदार अफसरों को बाहर कर दिया। उन्होंने फाइलों के नाम पर डराकर पैसे वसूलने और बेवजह जांच के नाम पर मानसिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर के नाम पर शोषण किया गया, और कुछ मामलों में यौन शोषण भी हुआ। नागरिकों और व्यापारियों से मोटी रिश्वत लेने का भी जिक्र किया गया।
राजनीतिक और जातीय दबाव का प्रभाव
संदीप कुमार ने अपने नोट में लिखा कि पूरन कुमार अपने परिवार की राजनीतिक और जातीय ताकत का इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। उन्होंने कहा कि पूरन कुमार का मानना था कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि उनके घरवाले आईएएस, एमएलए और एससी आयोग में हैं। इस ताकत का इस्तेमाल कर उन्होंने खुलकर भ्रष्टाचार किया, जिसे रोकने वाला कोई नहीं था।
सुसाइड नोट में आरोप और सामाजिक उत्पीड़न
पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत प्रताड़ना, अपमानजनक भाषा और झूठे मामलों में फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य सचिव, पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व डीजीपी और अन्य शीर्ष अधिकारियों के नाम लिए। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने जातिगत उत्पीड़न किया और शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकाया गया और अपमानित किया गया।
मानसिक और सामाजिक दबाव का जिक्र
पूरन कुमार ने अपने नोट में लिखा कि वह जाति आधारित भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न का शिकार रहे। उन्होंने कहा कि प्रमोशन, पोस्टिंग और छुट्टियों में भी उनके साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीजीपी और एसपी ने उनके खिलाफ झूठे मामलों में फंसाने के लिए साजिश रची।
पुलिस महकमे में जारी विवाद और जांच
पूरन कुमार की मौत को जहां एक ओर उत्पीड़न का परिणाम माना जा रहा है, वहीं ASI संदीप कुमार के वीडियो ने इस मामले को दो विरोधी धाराओं में फंसा दिया है। एक तरफ जातिगत उत्पीड़न का आरोप है, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश। पुलिस ने दोनों सुसाइड नोट और वीडियो को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। इस जटिल मामले में अब जांच का दायरा और भी विस्तृत हो गया है, जिससे सच्चाई का पता लगाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।











