हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की संदिग्ध मौत का नया खुलासा
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और एडीजीपी वाई पूरन कुमार की मौत के मामले में अब नई जानकारी सामने आई है। परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बिना अनुमति के पूरन कुमार का शव अस्पताल ले जाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना ही सेक्टर-16 अस्पताल से पूरन कुमार का शव पीजीआई (Postgraduate Institute of Medical Education and Research) चंडीगढ़ भेज दिया।
परिजनों का आरोप और परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रिया
पूरन कुमार के रिश्तेदारों ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके साले अमित रत्तन ने कहा, “परिवार की कोई भी सहमति नहीं ली गई, फिर भी पुलिस ने बिना अनुमति शव को पीजीआई भेज दिया। एक एडीजीपी का निधन हो गया, लेकिन हमें अभी तक न्याय नहीं मिला है।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने उनके साथ न्याय नहीं किया और शव को जबरदस्ती अस्पताल पहुंचाया।
मामले की जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच के आदेश दिए हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने छह सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है ताकि इस मौत के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके। वहीं, हरियाणा IAS (Indian Administrative Service) एसोसिएशन ने भी इस पूरे प्रकरण को उच्चतम स्तर पर जांच की मांग की है।
मृतक अधिकारी की आत्महत्या और विवादित सुसाइड नोट
7 अक्टूबर को पूरन कुमार का शव उनके चंडीगढ़ स्थित आवास से बरामद किया गया था। वह रोहतक के सुनारिया पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (PTC) में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) के पद पर तैनात थे। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम लिखे थे। इस नोट में उन्होंने जातीय भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
परिवार का विरोध और न्याय की मांग
उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने हरियाणा डीजीपी और रोहतक एसपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे पूरन कुमार का अंतिम संस्कार नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पति के पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी थी।
जांच और सामाजिक प्रतिक्रिया
चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक छह सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया है। हरियाणा IAS एसोसिएशन ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा है कि इस मामले में उठाए गए मुद्दों की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।











