हरियाणा विधानसभा में 590 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला उठा
सोमवार को हरियाणा विधानसभा में IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले का मुद्दा जोरदार तरीके से चर्चा में आया। विपक्ष ने सरकार को कठोर सवालों का सामना कराते हुए इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ और बैंक की प्रतिक्रिया
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक सरकारी विभाग ने IDFC फर्स्ट बैंक से अपना खाता बंद कर फंड को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। जांच में पता चला कि खाते में मौजूद राशि और रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच बड़ा अंतर था। बैंक की आंतरिक जांच में यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ (Chandigarh) स्थित शाखा के कुछ कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी धन के साथ धोखाधड़ी की है। बैंक ने रविवार को अपने रेगुलेटरी फाइलिंग में इस ₹590 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा किया और साथ ही इस घटना की जानकारी बैंकिंग नियामक (Regulatory Authority) को दी। पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और सरकार का कदम
विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुडा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बैंक ने गड़बड़ियों का पता लगाया है, इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने अब तक क्या कार्रवाई की है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए पारदर्शिता की मांग की। मुख्यमंत्री सैनी ने जवाब में कहा कि जैसे ही इस तरह की विसंगतियां सामने आईं, तुरंत ही संबंधित खातों की राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर दी गई। साथ ही, IDFC फर्स्ट बैंक को सरकारी कामकाज के पैनल से हटा दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और विजिलेंस विभाग इस मामले की जांच कर रहे हैं।
सीएम ने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी बैंक कर्मचारी या सरकारी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम करती है और इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि इस घोटाले में शामिल तीन से चार विभागों के पैसे IDFC फर्स्ट बैंक में जमा थे। जब ट्रांजेक्शन की जांच की गई, तो गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद बाकी रकम भी बैंक को ट्रांसफर कर दी गई। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस भ्रष्टाचार में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में 450 करोड़ रुपये की फंडिंग का भी जिक्र किया गया है, और यदि बैंक दोषी पाया जाता है, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बैंक की फाइलिंग के अनुसार, एक हरियाणा सरकारी विभाग ने अपने खाते को बंद कर शेष राशि को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। इसी प्रक्रिया के दौरान खाते में दर्ज राशि और वास्तविक बैलेंस के बीच अंतर पाया गया। जांच के दौरान ऐसी विसंगतियों का पता अन्य सरकारी खातों में भी चला, जिसके बाद 18 फरवरी से बैंक और संबंधित सरकारी विभागों के बीच बातचीत शुरू हुई।
बैंक ने अपनी सफाई में कहा है कि प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला केवल हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों तक ही सीमित है, जो चंडीगढ़ (Chandigarh) शाखा के माध्यम से संचालित हो रहे थे। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस शाखा के अन्य ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि अभी इस धोखाधड़ी की कुल राशि का अंतिम आंकड़ा रिकॉन्सिलिएशन (Reconciliation) के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, जिसमें दावों का सत्यापन और संभावित रिकवरी शामिल है। इस मामले की जांच के परिणामों का सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे बैंकिंग प्रणाली और सरकारी खातों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।









