गुरुग्राम में भारी बारिश ने प्रशासन की पोल खोल दी
दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख शहरों में से एक गुरुग्राम में महज डेढ़ से दो घंटे की तेज और भारी बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की विकास योजनाओं की असली तस्वीर सामने ला दी है। लगभग 90 मिमी की बारिश ने दोपहर 12 से 3 बजे के बीच पूरे शहर को जलमग्न कर दिया, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।
स्कूलों से घर लौट रहे बच्चों का सफर हुआ खौफनाक
यह बारिश उस समय हुई जब कई स्कूलों के बच्चे छुट्टी के बाद अपने बसों और वैन से घर लौट रहे थे। सुभाष चौक जैसे प्रमुख चौराहों पर पानी 3 से 4 फीट तक भर गया, जिससे दर्जनों स्कूल बसें रास्ते में ही फंस गईं। इस जलभराव के कारण बच्चों का मिनटों का सफर घंटों में बदल गया, और वे खौफनाक इंतजार में फंस गए।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की लापरवाही उजागर
सड़कें पानी में डूबने के कारण कई बच्चे 5 से 8 घंटे तक फंसे रहे, बिना भोजन और पानी के। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे सामान्यतः दोपहर 1:30 बजे घर पहुंच जाते हैं, लेकिन इस बार रात 8 से 8:30 बजे तक वे घर नहीं पहुंच सके। खास बात यह है कि इस दौरान न तो जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही गुरुग्राम पुलिस की कोई मदद मिली।
रितेश नाम के एक पिता ने बताया कि उनकी 7 साल की बेटी आमतौर पर आधे घंटे में घर आ जाती है, लेकिन वह रात को 8 बजे घर पहुंची। उन्होंने कहा, “इतने घंटे बस में फंसे बच्चे का मनोबल टूटना स्वाभाविक है।” इस भीषण स्थिति में स्कूल के शिक्षकों और स्टाफ ने बच्चों का हौसला बनाए रखने की कोशिश की, उन्हें बिस्किट और खाने-पीने का सामान देकर शांत किया।
अभिभावकों का गुस्सा इस बात पर फूटा कि हर साल टैक्स देने के बावजूद शहर की जल निकासी व्यवस्था सही नहीं हो पाई है। साल 2016 के महाजाम के बाद करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज सिस्टम, अंडरपास और सीवरेज का सुधार किया गया, लेकिन फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रशासन की इस नाकामी के कारण बारिश के समय स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन क्लास का आदेश देना पड़ता है, जो स्थायी समाधान नहीं है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि बुनियादी जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह के खौफनाक मंजर से बच्चों को बचाया जा सके।











