पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का जल विवाद में भूमिका का संकेत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद को सुलझाने में वह मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार पंजाब के जल हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में पंजाब का हक नहीं मारेगा। इस बयान के माध्यम से उन्होंने राज्य के जल अधिकारों को लेकर अपनी दृढ़ता का संकेत दिया है।
पंजाब का जल संकट और साझा जल संसाधनों का विवाद
सीएम मान ने बताया कि तीन नदियों से मिलकर 34.34 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का प्रवाह होता है, जिसमें से पंजाब को केवल 14.22 एमएएफ यानी लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। जबकि बाकी 60 प्रतिशत पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों को जाता है, जिनमें से कोई भी इन नदियों में सीधे पानी नहीं बहाता। पंजाब के जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सतही जल की कमी के कारण भूमिगत जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 में जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, और पंजाब में भूमिगत जल निकासी की दर देश में सबसे अधिक है।
जल साझा करने और हितों की रक्षा के लिए सुझाव
सीएम मान ने पंजाब की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक संयुक्त वर्किंग कमेटी के गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब अपनी जरूरतों को नजरअंदाज कर अन्य राज्यों को पानी देता रहा है, लेकिन बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना अकेले पंजाब को ही करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्णय लेते समय पंजाब के हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने गुरबाणी की पंक्ति ‘पवण गुरु पाणी पिता माता धरत महत’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे गुरु साहिबान ने वायु को गुरु, पानी को पिता और धरती को माता का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकार गुरु साहिबान के मार्ग पर चल रही है। दोनों सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से हल करने के लिए प्रयासरत हैं, और यह कोई जीत या हार का सवाल नहीं है, बल्कि पंजाब और उसके लोगों के हितों का सवाल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों राज्यों के बीच निरंतर बैठकें और सहयोग से इस विवाद का समाधान निकलेगा, जिससे विकास और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा। इस दौरान जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।











