बारामती एयरक्रैश की जांच में मुख्य मुद्दा विजिबिलिटी का महत्व
बारामती में हुए विमान दुर्घटना की जांच के दौरान सबसे बड़ा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कम दृश्यता के बावजूद विमान को लैंडिंग क्यों करने का प्रयास किया गया। DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) के सूत्रों के अनुसार, इस दुर्घटना की जांच में दो मुख्य पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहला, क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी और दूसरा, क्या पायलट ने रनवे को देखने में कोई गलती की।
जांच के मुख्य बिंदु और रनवे लैंडिंग का संदर्भ
DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्लास G एयरफील्ड पर लैंडिंग के लिए न्यूनतम विजिबिलिटी सीमा पांच किलोमीटर है। उड़ान के प्रस्थान के समय, विजिबिलिटी का आंकड़ा तीन से पांच किलोमीटर के बीच था। बारामती का यह एयरफील्ड एक अनकंट्रोल्ड (Class G) एयरपोर्ट है, जहां कोई फुल-टाइम एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) नहीं होता। यहां पायलट को स्वयं ही दृश्यता और हालात का आकलन करना पड़ता है।
लैंडिंग के दौरान विजिबिलिटी और पायलट की निर्णय प्रक्रिया
जब विमान लैंडिंग के करीब था, तब क्रू से पूछा गया कि क्या रनवे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शुरुआत में, इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद, विमान को फिर से घुमाने का प्रयास किया गया। दूसरी बार अप्रोच के दौरान भी रनवे न दिखने की बात कही गई, लेकिन थोड़ी देर बाद ही रनवे दिखने की पुष्टि कर दी गई। DGCA सूत्रों का मानना है कि यह संभवतः रनवे को देखने में गलत आकलन का मामला हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि नियम के अनुसार, कम से कम पांच किलोमीटर विजिबिलिटी जरूरी थी, जो इस मामले में पूरी नहीं हुई। जांच में यह भी पता चला कि जब पायलट को अंततः रनवे दिखाई दिया, तो उसे एहसास हुआ कि उसकी दृष्टि में गलती हुई है। इसके बाद, उसने विमान को सही दिशा में लाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक विमान की गति बहुत तेज हो चुकी थी और सुरक्षित लैंडिंग देर से संभव हो पाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित विजिबिलिटी और सेमी टेबल-टॉप रनवे जैसी परिस्थितियों में ऐसी दृश्यता संबंधी गलतियां आम हो सकती हैं। DGCA ने यह भी संकेत दिया है कि जांच पूरी होने के बाद, क्लास G एयरस्ट्रिप्स पर उड़ान भरने और उतरने के लिए नई ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।










