उपराष्ट्रपति का संघ पर महत्वपूर्ण बयान
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पुस्तक 100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि हमें विश्व स्तर पर सफलता प्राप्त करनी है, तो हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है। यह विचार संघ की व्यापक सोच और उसकी रणनीति को दर्शाता है, जो देश की एकता और सेवा भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।
संघ की भावना और उसकी भूमिका का विश्लेषण
राधाकृष्णन ने तमिल में लिखी गई संघ पर एक कविता का उल्लेख किया, जिसमें संगठन की तुलना गंगा नदी से की गई है। उन्होंने कहा कि जैसे गंगा निरंतर प्रवाहमान रहती है और लोगों के कल्याण के लिए बहती है, वैसे ही संघ भी सेवा के भाव का प्रतीक है। इस कविता में संघ की निस्वार्थ सेवा और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाया गया है, जो देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है।
प्रधानमंत्री मोदी और संघ की विचारधारा
उन्होंने पुस्तक के बारे में बात करते हुए कहा कि इसका शीर्षक संघ की मूल भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। संघ अपने दैनिक शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण और नेतृत्व कौशल को विकसित करने का कार्य करता है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उल्लेख का भी जिक्र किया। पुस्तक के ‘एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग’ अध्याय में बताया गया है कि मोदी ने स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री बनने तक की यात्रा में ‘देश प्रथम’ और ‘सेवा’ को अपने शासन का मुख्य आधार बनाया है। यह संघ की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की विचारधारा का जीवंत उदाहरण है।









