शहरी निकायों का सड़क धूल नियंत्रण में खर्च और प्रगति
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि शहरी स्थानीय निकायों ने सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए लगभग 7094 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। देश के कुल 130 शहर इस योजना के अंतर्गत आते हैं, जिनमें से 48 शहर मिलियन-प्लस श्रेणी में आते हैं और उन्हें 15वें वित्त आयोग के ‘मिलियन-प्लस सिटीज चैलेंज फंड’ से वित्तीय सहायता मिलती है। शेष 82 शहरों को पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) की प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं से फंडिंग प्राप्त हुई है।
NCAP के तहत फंडिंग और प्रदूषण नियंत्रण प्रयास
मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत कुल 13852 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनमें सड़क की धूल के प्रबंधन पर सबसे अधिक खर्च हुआ है। केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी शिवसेना सांसदों एकनाथ शिंदे और रविंद्र वायकर के सवालों के जवाब में दी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है, जिसमें सड़क की धूल का योगदान सबसे बड़ा माना गया है।
सड़क की धूल से प्रदूषण में कमी और नई तकनीकों का प्रयोग
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 के मुकाबले 2024-25 में 103 शहरों में PM10 स्तर में सुधार हुआ है। इनमें से 22 शहरों ने राष्ट्रीय मानक (NAAQS) को भी पूरा कर लिया है, जहां PM10 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम है। मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पुणे जैसे व्यस्त इलाकों में नई तकनीकों और सामग्री का इस्तेमाल कर धूल को उड़ने से रोका जा रहा है, जिससे वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।











