दिल्ली के बुजुर्ग डॉक्टर दंपति के साथ साइबर ठगी का मामला
दिल्ली के प्रतिष्ठित इलाके ग्रेटर कैलाश में रहने वाले एक वरिष्ठ डॉक्टर और उनकी पत्नी के साथ साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी का बड़ा खेल खेला है। यह दंपति संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में लंबे समय तक सेवा देने के बाद 2016 में भारत लौटे थे और शांति से जीवन बिता रहे थे। लेकिन हाल ही में, उन्हें करीब 15 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि पहुंचाई गई है, जो साइबर ठगी का एक जटिल मामला है।
साइबर ठगों का नकली पुलिस और कोर्ट का खेल
24 दिसंबर 2025 को इस बुजुर्ग दंपति को एक फोन कॉल आया, जिसमें खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग में हो रहा है। कुछ ही मिनटों बाद, एक वीडियो कॉल आई जिसमें पुलिस की वर्दी पहने अधिकारी और दिल्ली पुलिस का लोगो दिखाई दे रहा था। इस खेल के दौरान, साइबर अपराधियों ने खुद को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बताया और घर से बाहर निकलना, किसी से बात करना या फोन पर बात करना भी अपराध माना जाएगा।
फर्जी जज और नकली कोर्ट का भ्रामक खेल
अगली वीडियो कॉल में एक नकली कोर्ट का सेटअप दिखाया गया, जिसमें एक जज की भूमिका निभाने वाला व्यक्ति काले कोट में था। उसने कहा कि यदि वे सहयोग नहीं करेंगे, तो तुरंत गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह पहली बार था जब साइबर अपराधियों ने न केवल फर्जी पुलिस बल्कि नकली सुप्रीम कोर्ट और जज भी बनाकर धोखाधड़ी की। जब डॉक्टर तनेजा को शक हुआ और उन्होंने दिल्ली पुलिस के स्थानीय SHO से संपर्क करने की कोशिश की, तो साइबर ठगों ने उसी SHO को वीडियो कॉल पर धमकाया। नकली जज ने यह भी कहा कि मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और स्थानीय पुलिस इसमें दखल नहीं दे सकती।
इन 15 दिनों में, साइबर अपराधियों ने उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। जांच शुल्क, जमानत, कोर्ट वेरिफिकेशन जैसे नाम पर लगातार नकली दस्तावेज भेजे गए। इन फर्जी दस्तावेजों में अरेस्ट मेमो, कोर्ट के आदेश, बैंक नोटिस और सरकारी सील जैसी दिखने वाली कॉपी शामिल थीं। इन धोखाधड़ी के कारण, उनके खातों से लगभग 14 करोड़ 85 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए, जो उन्होंने अपने लंबे करियर में कमाए थे।
बुजुर्ग दंपति का परिवार और पुलिस कार्रवाई
यह बुजुर्ग दंपति के बच्चे विदेश में रहते हैं, और वे अपने माता-पिता की इस स्थिति को समझकर बहुत परेशान हैं। जब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट से संपर्क किया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच के तहत बैंक ट्रांजेक्शन, IP एड्रेस, कॉल रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों की छानबीन शुरू कर दी है। इस जटिल मामले में, पुलिस की टीम ठगों की गतिविधियों का पता लगाने और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।











