साकेत हादसे में पार्वती आंटी की बहादुरी और दुखद निधन
दिल्ली के महरौली क्षेत्र में हुए भीषण इमारत हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में ‘पार्वती आंटी’ की जान चली गई, जिन्होंने मलबे के नीचे दबने के बावजूद छात्रों को बचाने का साहस दिखाया। उस समय इमारत के अंदर लगभग 12 से 13 लोग मौजूद थे, जिनमें कई छात्र भी शामिल थे। पार्वती आंटी पहले सुरक्षित बाहर निकल आई थीं, लेकिन अंदर फंसे बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए वे फिर से अंदर दौड़ीं। उनकी बहादुरी के बावजूद, अचानक मलबे का बड़ा हिस्सा गिरने से वे वापस बाहर नहीं आ सकीं।
पार्वती आंटी का क्षेत्र में खास स्थान और उनके योगदान
महरौली में पढ़ने वाले छात्रों और काम करने वाले लोगों के बीच पार्वती आंटी की कैंटीन एक दूसरे घर जैसी थी। यहाँ खासकर मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्र अक्सर भोजन करने आते थे। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे सिर्फ भोजन ही नहीं कराती थीं, बल्कि हर किसी का हालचाल भी पूछती थीं। अपनेपन और स्नेह के कारण वे पूरे इलाके में बहुत प्रिय थीं। उनके इस प्रेमपूर्ण व्यवहार ने उन्हें सभी का दिल जीत लिया था।
रातभर चला रेस्क्यू अभियान और जांच के परिणाम
हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य टीमों ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शुरुआत में चार-पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन पार्वती आंटी मलबे के नीचे ही रह गईं। काफी देर बाद उन्हें बाहर निकालकर एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रेस्क्यू के दौरान छात्र और स्थानीय लोग लगातार पूछते रहे, “पार्वती आंटी मिल गईं क्या?”
पुलिस की जांच में पता चला है कि जिस पांच मंजिला इमारत के गिरने से यह हादसा हुआ, वहाँ निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस मामले में एमसीडी के दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, बिल्डिंग के मालिक करमवीर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो घटना के बाद से फरार था। इस दुखद दुर्घटना ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है।










