जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक का जबरन निष्कासन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने वहां से उठाकर अस्पताल ले गई। पुलिस ने इस कार्रवाई को उच्च न्यायालय के आदेश और चिकित्सकों की सलाह के आधार पर अंजाम दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़प भी देखने को मिली।
प्रमुख नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की
पुलिस की इस कार्रवाई पर कई राजनीतिक हस्तियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोदी सरकार के मूल सिद्धांत असत्य और हिंसा हैं। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे अनशन से हटाना गलत है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कोई भी शक्ति इन मुद्दों को उठाने से देश के युवाओं को नहीं रोक सकती।
केजरीवाल, संजय सिंह और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार का यह अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी और आंदोलन को दबाने के बजाय शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। केजरीवाल ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक के साथ की गई जबरदस्ती मोदी सरकार की हार है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण मार्च से डर गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज किया और सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराया, ताकि इस आंदोलन को दबाया जा सके। संजय सिंह ने यह भी कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च होने वाला है, जिसमें देश के युवा और विभिन्न दलों के सांसद भाग लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सोनम वांगचुक की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
सामाजिक नेताओं डिंपल यादव और आदित्य ठाकरे ने भी सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की। डिंपल यादव ने कहा कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाना लोकतंत्र और संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं कर रही है। वहीं, शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि भारत में लोकतंत्र को बलपूर्वक कुचलने का यह शर्मनाक प्रयास है, और छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध भी अब सहन नहीं किया जा रहा।











