सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला रिव्यू और धर्म बनाम समानता के मामलों पर सुनवाई शुरू की
सुप्रीम कोर्ट ने अब सबरीमाला मंदिर से जुड़े रिव्यू याचिकाओं और उससे संबंधित धर्म और समानता के विवादित मामलों पर सुनवाई शुरू कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई 9 जजों की संविधान पीठ (कॉन्स्टिट्यूशन बेंच) करेगी, और इस प्रक्रिया में बहस पूरी तरह से खुली अदालत में होगी।
सुनवाई का क्रम और मुख्य मुद्दे
प्रधान न्यायाधीश (CJI) ने बताया कि पहले सबरीमाला से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी, उसके बाद ही संबंधित अन्य मामलों पर बहस होगी, जब तक कि पक्षकार यह न कहें कि ये मुद्दे अलग हैं। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी कहा कि सभी मामलों में कानूनी सवाल समान हैं और आपस में जुड़े हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 2019 में कोर्ट ने जिन सवालों को तय किया था, उन्हीं पर अब 9 जजों की पीठ सुनवाई करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि 10 फरवरी 2020 को दिए गए आदेश का जिक्र करते हुए, अब इन मामलों पर अंतिम फैसला लेने का समय आ गया है ताकि लंबे समय से लंबित कानूनी विवाद समाप्त हो सकें।
अधिकारियों और सुनवाई की प्रक्रिया
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने बताया कि उस समय सुनवाई के दौरान एक जज को स्वाइन फ्लू हो गया था, और बाद में कोविड महामारी के कारण 9 जजों की एक साथ बैठकर सुनवाई संभव नहीं हो पाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 14 मार्च 2026 तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करें। इसके बाद, 7 अप्रैल 2026 से 9 जजों की संविधान पीठ सुनवाई शुरू करेगी।
सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दों में संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की सीमा, आवश्यक धार्मिक प्रथा (Essential Religious Practice) का परिभाषा, धार्मिक संप्रदाय (Religious Denomination) की व्याख्या, और धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) शामिल हैं। साथ ही, दाऊदी बोहरा समुदाय, पारसी महिलाओं की धार्मिक स्थिति, और मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश जैसे मामलों पर भी सुनवाई होगी।
सभी पक्षों को तय समय-सारणी का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए, कोर्ट ने कहा कि पहले मुख्य कानूनी सवालों पर सुनवाई होगी, उसके बाद ही अन्य जुड़े मामलों में अतिरिक्त मुद्दों पर विचार किया जाएगा।










